
बोले- कार्रवाई शुरू हुई तो सरगना तक पहुंचने की उम्मीद बंधी, रुकते ही संदेह स्वाभाविक
पुलिस जिस दिन प्रभावी कार्रवाई का फैसला करेगी, उसी दिन से सट्टा और ड्रग्स के कारोबार पर लगाम लग सकती है : सरयू राय
जमशेदपुर : शहर में ड्रग्स और सट्टेबाजी के बढ़ते कारोबार को लेकर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो लगा था कि नेटवर्क की कड़ियां एक-एक कर खुलेंगी और कार्रवाई आगे बढ़ते हुए सरगना तक पहुंचेगी। लेकिन अभियान के अचानक रुक जाने से सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
प्रेस कांफ्रेंस में सरयू राय ने कहा कि ड्रग्स और सट्टेबाजी अब महज कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है। इसका असर युवाओं के भविष्य, परिवारों की सुरक्षा और समाज के व्यापक ताने-बाने पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शहर में ड्रग्स का कारोबार तेजी से फैलने की बातें सामने आ रही हैं और इसकी पहुंच स्कूल-कॉलेजों तक होने की आशंकाएं भी चिंता बढ़ाती हैं।
कार्रवाई शुरू हुई तो पुलिस से बढ़ी थी उम्मीद
सरयू राय ने कहा कि जब पुलिस ने सट्टा और ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी, तब उन्होंने पुलिस के प्रयास की सराहना की थी। इस सिलसिले में उनकी एसएसपी से भी बातचीत हुई थी।
उनके मुताबिक, एसएसपी ने बताया था कि कार्रवाई के दौरान नेटवर्क से जुड़े कई लिंक मिले हैं और जांच आगे बढ़ने पर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। इससे उम्मीद जगी थी कि पुलिस कार्रवाई को आगे बढ़ाएगी और नेटवर्क के बड़े खिलाड़ियों तथा कथित सरगनाओं तक पहुंचेगी।
सरयू राय ने कहा कि यदि कार्रवाई लगातार जारी रहती तो नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती थी। संभव है कि जांच आगे बढ़ने पर सरगनाओं तक भी पुलिस पहुंच जाती। ऐसे में अचानक कार्रवाई रुकने से सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरगनाओं को पकड़ना पुलिस की जिम्मेदारी
सरयू राय ने कहा कि ड्रग्स और सट्टेबाजी के नेटवर्क के सरगनाओं तक पहुंचना और उन्हें कानून के दायरे में लाना पुलिस का काम है। सामाजिक संगठन और आम नागरिक जागरूकता फैलाने तथा पुलिस को सहयोग करने की भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सामाजिक स्तर पर सहयोग का सिलसिला जारी रहेगा, लेकिन संगठित अपराध के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई पुलिस को ही करनी होगी।
‘पुलिस चाहे तो रुक सकता है कारोबार’
सरयू राय ने कहा कि ड्रग्स और सट्टेबाजी का कारोबार प्रभावी पुलिस कार्रवाई के बिना लंबे समय तक चलना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि पुलिस जिस दिन दृढ़ता से कार्रवाई करने का फैसला करेगी, उसी दिन से इस कारोबार पर रोक लगाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
उन्होंने पुलिस के अलावा दूसरे विभागों में भी भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतों का जिक्र किया। उनके अनुसार, कुछ अधिकारियों के काम करने में रुचि नहीं लेने की शिकायतें भी सामने आती हैं।
हालांकि, सरयू राय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित अभियान पुलिस के खिलाफ नहीं होगा। उनका कहना है कि अभियान का उद्देश्य पुलिस के सहयोग से समाज को ड्रग्स और सट्टेबाजी के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।
ड्रग्स से जुड़े अपराधों पर भी जताई चिंता
सरयू राय ने ड्रग्स और अपराध के बीच संबंध का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नशे की जरूरत पूरी करने के लिए कुछ लोग चोरी और छिनतई जैसे अपराधों की ओर बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नशे की लत के कारण कुछ लोग पैसे जुटाने के लिए लोहा-तांबा जैसी सामग्री चोरी कर बेचने तक पहुंच जाते हैं। उनके मुताबिक, ड्रग्स की गिरफ्त में आने वाले बच्चों और युवाओं का असर केवल उन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा ड्रग्स लेकर घर लौटता है तो परिवार के सदस्यों पर किस तरह का मानसिक दबाव पड़ता होगा, इसे समझा जा सकता है। नशे के कारण परिवारों में तनाव और असुरक्षा की स्थिति पैदा होने की चिंता भी उन्होंने व्यक्त की।
ऑनलाइन सट्टेबाजी पर साइबर जांच की मांग
सरयू राय ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के बढ़ते स्वरूप को लेकर भी पुलिस से सक्रिय कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक के दौर में ऑनलाइन सट्टेबाजी युवाओं तक आसानी से पहुंच सकती है।
उन्होंने डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन आईडी और इंटरनेट आधारित नेटवर्क के जरिए चलने वाले सट्टेबाजी के कारोबार की साइबर जांच की जरूरत बताई। उनका कहना है कि पुलिस को ऐसे नेटवर्क का स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
सरयू राय ने कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी की जांच केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि डिजिटल लेनदेन और इंटरनेट आधारित नेटवर्क की कड़ियों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।
2 अक्टूबर को होगा ‘विचार क्रांति सम्मेलन’
सरयू राय ने बताया कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को साकची स्थित धालभूम क्लब में ‘सट्टेबाजी एवं ड्रग्स के दुष्प्रभाव पर विचार क्रांति सम्मेलन’ आयोजित किया जाएगा।
सम्मेलन पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होगा। इसके बाद सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक अधिकारी मनोज सिंह के नेतृत्व में जन-जागरूकता अभियान चलाने के स्वरूप पर विचार किया जाएगा। इसके बाद अभियान को व्यापक स्तर पर शुरू करने की योजना है।
सरयू राय ने कहा कि ड्रग्स युवाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक स्थिति और रोजगार की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। वहीं, सट्टेबाजी युवाओं को कम समय में अधिक पैसा कमाने के भ्रम में डाल सकती है और इसके कारण कर्ज तथा आर्थिक संकट जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
पति ने ड्रग्स का विरोध किया तो हत्या का आरोप
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सलमा नाम की महिला ने अपने पति की हत्या का मामला भी उठाया। सलमा ने कहा कि उनके शौहर ड्रग्स के खिलाफ लोगों को जागरूक करते थे और उनकी हत्या कर दी गई।
सलमा के अनुसार, हत्या के आरोपी जेल में हैं, लेकिन उनके मुताबिक ड्रग्स का नेटवर्क अब भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायत किए जाने के बावजूद उन्हें पुलिस की ओर से सुरक्षा नहीं मिली।
महिला ने शहर में ब्राउन शुगर के कारोबार के जारी रहने का दावा भी किया। उनका कहना था कि पति की हत्या के बाद वह अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित रहती हैं।
सलमा ने बताया कि उनके बच्चे पढ़ाई करते हैं और ट्यूशन भी जाते हैं, लेकिन पिता की हत्या के बाद उन्हें हर समय बच्चों की सुरक्षा की चिंता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि इसी डर के कारण वह बच्चों को घर से बाहर भेजने को लेकर भी आशंकित रहती हैं।
पुलिस कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता पर जोर
सरयू राय ने कहा कि ड्रग्स और सट्टेबाजी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। उनका कहना है कि परिवारों, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ना होगा।
उन्होंने दोहराया कि प्रस्तावित अभियान का उद्देश्य पुलिस के खिलाफ माहौल बनाना नहीं, बल्कि पुलिस के सहयोग से समाज को जागरूक करना है। उनका कहना है कि ड्रग्स और सट्टेबाजी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के साथ लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।





