
नेचर संस्था के इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत छात्राओं ने लिया व्यावहारिक प्रशिक्षण
जमशेदपुर : नेचर संस्था द्वारा संचालित इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत राजनीति शास्त्र की छात्राओं ने पश्चिम बागबेड़ा पंचायत के बड़ौदा घाट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का शैक्षणिक फील्ड विजिट किया। इस अध्ययन दौरे का उद्देश्य छात्राओं को भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था, सार्वजनिक नीतियों के क्रियान्वयन तथा महिला एवं बाल विकास से संबंधित सरकारी योजनाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली से परिचित कराना था।
फील्ड विजिट के दौरान छात्राओं ने आंगनबाड़ी केंद्र में संचालित विभिन्न योजनाओं और सेवाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया तथा यह समझने का प्रयास किया कि सरकारी नीतियां जमीनी स्तर पर किस प्रकार लागू होती हैं।

ICDS योजना और मिशन पोषण की कार्यप्रणाली को करीब से समझा
दौरे के दौरान आंगनबाड़ी सेविका रीता पात्रों ने छात्राओं को एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निरंतर सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
उन्होंने बताया कि ‘मिशन पोषण’ के तहत कुपोषण को कम करने, बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को बेहतर बनाने तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। साथ ही टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श और जागरूकता गतिविधियों की भी नियमित व्यवस्था की जाती है।

पूर्व-विद्यालय शिक्षा और खेल आधारित शिक्षण गतिविधियों का किया अवलोकन
फील्ड विजिट के दौरान छात्राओं ने केंद्र में बच्चों को दी जाने वाली पूर्व-विद्यालय (Pre-School) शिक्षा की गतिविधियों का भी अवलोकन किया। उन्हें ‘आधारशिला’ तथा ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0’ के अंतर्गत संचालित शिक्षण मॉडल के बारे में जानकारी दी गई।
छात्राओं ने देखा कि किस प्रकार खेल-खिलौनों, गतिविधि आधारित शिक्षण सामग्री और रचनात्मक तरीकों के माध्यम से बच्चों के बौद्धिक एवं सामाजिक विकास को बढ़ावा दिया जाता है। इस दौरान उन्हें बाल विकास और प्रारंभिक शिक्षा के महत्व को भी विस्तार से समझाया गया।

पंचायत और स्थानीय स्वशासन व्यवस्था की अहम कड़ी हैं आंगनबाड़ी केंद्र
अध्ययन दौरे के दौरान छात्राओं ने यह भी जाना कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण और शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पंचायती राज व्यवस्था और स्थानीय स्वशासन की योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीण स्तर पर महिलाओं और बच्चों से जुड़ी सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका को छात्राओं ने करीब से समझा और प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

‘राजनीति विज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं’ : डॉ. कविता परमार
इंटर्नशिप कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. कविता परमार ने कहा कि राजनीति विज्ञान विषय का अध्ययन केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्राओं को जन-कल्याणकारी योजनाओं, प्रशासनिक तंत्र और नीति निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए ऐसे फील्डवर्क और व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अध्ययन दौरे विद्यार्थियों को समाज, शासन और प्रशासन के बीच समन्वय को समझने का अवसर प्रदान करते हैं, जो उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
छात्राओं ने अनुभव को बताया प्रेरणादायक
फील्ड विजिट में शामिल छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह अध्ययन दौरा उनके लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखने के बाद उन्हें सरकारी योजनाओं के वास्तविक प्रभाव और उनके क्रियान्वयन की चुनौतियों को समझने का अवसर मिला।
छात्राओं का मानना है कि यह अनुभव उन्हें भविष्य में बेहतर नीति-निर्माता, शोधकर्ता और जागरूक नागरिक बनने में सहायता करेगा।
कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद
इस अवसर पर आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका एवं सहायिका के साथ इंटर्नशिप समन्वयक डॉ. कविता परमार, पंचायत समिति सदस्य मनीषा हाईब्रू तथा वार्ड सदस्य रूपा सिंह भी उपस्थित रहीं। सभी ने छात्राओं को जमीनी स्तर पर प्रशासन और विकास योजनाओं की भूमिका से अवगत कराया।





