
जमशेदपुर : चीनी और प्याज की बढ़ती कीमतों ने झारखंड में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। इसी बीच जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को टैग करते हुए कहा कि चीनी और प्याज के बाजार में कार्टेल, जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।
सरयू राय ने मांग की है कि चीनी को पुराने रेट पर बाजार में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर न पड़े।
मिल रेट में बढ़ोतरी से झारखंड पर पड़ सकता है असर
सरयू राय ने 22 अगस्त को उपलब्ध मिल रेट का हवाला देते हुए चीनी की कीमतों में हालिया तेजी पर सवाल उठाया। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों में चीनी का रेट करीब ₹5,820 से ₹6,000 प्रति क्विंटल तक है।
वहीं, उत्तर प्रदेश स्टेट शुगर कॉरपोरेशन की मोहीउद्दीनपुर मिल में चीनी का भाव ₹6,000 प्रति क्विंटल बताया गया है। इसी कॉरपोरेशन की पिपराइच और मुंडेरवा मिलों में यह दर बढ़कर ₹6,200 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है।
महाराष्ट्र में मिल स्तर पर कीमतें इससे भी अधिक बताई गई हैं। छत्रपति संभाजी राजे सहकारी चीनी उद्योग लिमिटेड ने एम-30 चीनी का रेट ₹6,800 प्रति क्विंटल, एसएस-30 का ₹6,700 प्रति क्विंटल और एस-30 का ₹6,675 प्रति क्विंटल तय किया है। इन दरों पर जीएसटी अतिरिक्त है।
इस हिसाब से मिल स्तर पर चीनी की कीमत लगभग ₹66.75 से ₹68 प्रति किलो तक पहुंच रही है।
नई गन्ना फसल आने वाली, फिर क्यों बढ़ रहे दाम?
सरयू राय ने चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी के समय पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि करीब एक से डेढ़ महीने के भीतर नई गन्ने की फसल आने वाली है। ऐसे में नई फसल के बाजार में आने में बहुत अधिक समय नहीं बचा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नई फसल आने वाली है तो इस समय चीनी के दाम में अचानक तेजी का क्या औचित्य है। उनका कहना है कि सरकार को इसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ने देने के बजाय तत्काल बाजार में हस्तक्षेप करना चाहिए।
स्टॉक और बड़े व्यापारियों की हो जांच
विधायक ने सरकार से चीनी की आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि—
- चीनी मिलों के पास कितना स्टॉक उपलब्ध है।
- बड़े थोक व्यापारियों और स्टॉकिस्टों ने कितनी चीनी जमा कर रखी है।
- बाजार में वास्तविक आपूर्ति कितनी हो रही है।
- कहीं निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक तो नहीं रखा गया है।
- कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी के लिए कोई कार्टेल सक्रिय तो नहीं है।
सरयू राय के अनुसार, यदि किसी व्यापारी या स्टॉकिस्ट के पास निर्धारित सीमा से अधिक माल मिलता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
जमाखोरी और कार्टेल पर कार्रवाई की मांग
सरयू राय का कहना है कि झारखंड जैसे राज्य में खाद्य वस्तुओं की बड़ी मात्रा दूसरे राज्यों से आती है। ऐसे में मिल स्तर पर कीमत बढ़ने का असर पहले थोक बाजार और फिर खुदरा बाजार पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कीमतें बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। इसके बजाय अभी से आपूर्ति, स्टॉक और थोक कीमतों की निगरानी शुरू कर देनी चाहिए, ताकि बिचौलियों या जमाखोरों को कीमत बढ़ाने का अवसर न मिले।
उनके मुताबिक सरकार को कार्टेल, कृत्रिम कमी और जमाखोरी—तीनों स्तरों पर एक साथ कार्रवाई करनी होगी।
प्याज की कीमतों पर भी सरयू राय ने जताई चिंता
चीनी के साथ-साथ सरयू राय ने प्याज की बढ़ती कीमतों को भी गंभीर मुद्दा बताया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज के दाम बढ़ रहे हैं और इस स्थिति में जमाखोरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने नाफेड (NAFED) की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप का वास्तविक असर बाजार में दिखाई देना चाहिए।
उनका कहना है कि केवल सरकारी स्तर पर घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। उपभोक्ताओं को इसका लाभ बाजार में वास्तविक कीमतों और पर्याप्त आपूर्ति के रूप में मिलना चाहिए।
जमशेदपुर, रांची और धनबाद पर विशेष निगरानी की जरूरत
सरयू राय ने झारखंड सरकार से राज्य के प्रमुख बाजारों में चीनी और प्याज के स्टॉक तथा थोक कीमतों की नियमित निगरानी करने का आग्रह किया है।
उन्होंने खास तौर पर जमशेदपुर, रांची और धनबाद जैसे बड़े बाजारों में अचानक कीमत बढ़ने की स्थिति में स्रोत स्तर तक जांच कराने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि यदि खुदरा बाजार में कीमत अचानक बढ़ती है तो प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि वृद्धि का कारण वास्तविक आपूर्ति संकट है या फिर व्यापारिक स्तर पर कृत्रिम कमी पैदा की गई है।
महंगाई का असर सिर्फ घरेलू बजट तक सीमित नहीं
सरयू राय ने कहा कि चीनी और प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमत बढ़ने का असर केवल घरेलू बजट पर नहीं पड़ता। इसका सीधा प्रभाव होटल-रेस्तरां, मिठाई कारोबार और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे कारोबारियों पर भी पड़ता है।
चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ सकती है, जबकि प्याज की कीमतों में तेजी का असर होटल, रेस्तरां और खानपान से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है।
ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की है कि बाजार में किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा होने से पहले ही आवश्यक कदम उठाए जाएं और उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
सरयू राय ने केंद्र और झारखंड सरकार से चीनी और प्याज की कीमतों पर तत्काल निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उनका जोर इस बात पर है कि बाजार में उपलब्ध स्टॉक की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि कहीं जमाखोरी या कार्टेल की भूमिका मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि पुराने रेट पर चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने, आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य रखने और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए सरकार को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।





