
8000 बनाम 18000 पर अटकी वार्ता, कर्मचारियों में बढ़ी नाराजगी
जमशेदपुर : Tata Steel Downstream Products Limited (टीएसडीपीएल) के कर्मचारियों का ग्रेड रिवीजन पिछले 31 महीनों से लंबित है। इस मुद्दे को लेकर प्रबंधन और यूनियन के बीच लगातार मैराथन बैठकों का दौर जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है।
जानकारी के अनुसार, वर्तमान वार्ता में प्रबंधन ने वेतन वृद्धि को 8000 रुपये पर सीमित रखा है, जबकि यूनियन 18000 रुपये की वृद्धि की मांग पर अड़ी हुई है। इस अंतर के कारण समझौता फिलहाल अटका हुआ है।
7 साल के समझौते पर सहमति, राशि पर विवाद बरकरार
सूत्रों के मुताबिक, पिछली बार हुए ग्रेड रिवीजन में औसतन 12000 रुपये की वृद्धि हुई थी और यह समझौता 6 वर्षों के लिए था। इस बार प्रबंधन ने शुरुआत से ही स्पष्ट कर दिया है कि नया समझौता 7 वर्षों के लिए किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर हालांकि सहमति की सूचना नहीं है पर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यूनियन ने अप्रत्यक्ष रूप से सहमति जता दी है, लेकिन वेतन वृद्धि की राशि को लेकर गतिरोध कायम है।
प्रबंधन की ओर से वार्ता का नेतृत्व सीएचआरओ करण लखानी कर रहे हैं, जबकि यूनियन की ओर से अध्यक्ष राकेश्वर पांडे बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं।
“31 महीने की देरी क्यों?”—कर्मचारियों का सवाल
ग्रेड रिवीजन में हो रही देरी को लेकर कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। उनका कहना है कि उसी शहर में टाटा मोटर्स, टाटा कमिंस और टाटा पावर जैसी कंपनियों में ग्रेड रिवीजन छह महीने के भीतर पूरा हो जाता है, जबकि टीएसडीपीएल में यह प्रक्रिया 31 महीनों से लंबित है।
कर्मचारियों ने यह भी चिंता जताई कि देरी के कारण उन्हें भत्तों और अन्य आर्थिक लाभों में नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि कई मामलों में एरियर का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
समाधान की उम्मीद, लेकिन गतिरोध बरकरार
लगातार चल रही बैठकों के बावजूद अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रबंधन और यूनियन के बीच जल्द ही सहमति बनेगी, जिससे लंबित ग्रेड रिवीजन का रास्ता साफ हो सके।





