Jamshedpur: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन के निधन पर वरिष्ठ विधायक सरयू राय ने सोमवार को गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें झारखंड की राजनीति का ‘प्रतीक पुरुष’ बताया। उन्होंने कहा कि ‘दिशोम गुरु’ का जाना सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा का विदा होना है।
राजनीतिक चेतना के पुरोधा थे शिबू सोरेन
सरयू राय ने कहा कि स्वर्गीय शिबू सोरेन ने झारखंड के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने झारखंड की पहचान, अधिकारों और संस्कृति को राष्ट्रीय विमर्श में स्थापित किया। वे चाहते थे कि झारखंड की सांस्कृतिक विशिष्टताएं कायम रहते हुए राज्य प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।
नीतीश सरकार के समय झामुमो ने निभाई थी अहम भूमिका
वर्ष 2000 की घटनाओं को याद करते हुए सरयू राय ने बताया कि जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में एक अल्पकालिक सरकार बनी थी, तब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने उसका समर्थन किया था। उस समय वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बिहार संयोजक के रूप में कार्यरत थे और शिबू सोरेन के साथ निकटता से काम करने का अवसर मिला।
दामोदर बचाओ आंदोलन में भी दिशोम गुरु की सक्रिय भूमिका
सरयू राय ने कहा कि 29 मई 2004 को शुरू किए गए दामोदर बचाओ आंदोलन की रूपरेखा पर उन्होंने खुद शिबू सोरेन से गहन चर्चा की थी। बाद में 24 और 25 सितंबर 2004 को रांची में आयोजित संगोष्ठी और प्रदर्शनी में दिशोम गुरु खुद मौजूद रहे और घंटों तक उसमें शामिल रहे। यह उनका सामाजिक सरोकार और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
हेमंत सोरेन पर है विरासत संभालने की जिम्मेदारी
विधायक राय ने कहा कि शिबू सोरेन के निधन से झारखंड की राजनीति में एक गहरा शून्य उत्पन्न हुआ है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। उनके विचार, संघर्ष और दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कंधों पर है।उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवार और समर्थकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।



