सफल बंद के लिए जनता और सहयोगी संगठनों का जताया आभार, कहा- अपराध, भ्रष्टाचार और महंगाई से परेशान है आम नागरिक
जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने शहर की बिगड़ती कानून-व्यवस्था के विरोध में आयोजित स्वतःस्फूर्त जमशेदपुर बंद को सफल बनाने के लिए शहरवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस बंद को जिस प्रकार आम जनता का स्वैच्छिक समर्थन मिला, वह शहर की जनभावनाओं और कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता का स्पष्ट संकेत है।
जारी बयान में सरयू राय ने बंद को सफल बनाने के लिए जमशेदपुर की जनता को बधाई देते हुए उन सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों और एनडीए समर्थकों का भी आभार जताया, जिन्होंने सड़कों पर उतरकर लोगों का उत्साह बढ़ाया और शांतिपूर्ण ढंग से बंद को सफल बनाने में सहयोग किया।
एनडीए और जदयू कार्यकर्ताओं से की संदेश को आत्मसात करने की अपील
सरयू राय ने विशेष रूप से एनडीए के घटक दलों, खासकर जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस स्वतःस्फूर्त बंद से मिले जनसंदेश को गंभीरता से ग्रहण करें। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि जनता की अपेक्षाओं और बदलाव की इच्छा का प्रतीक है। इसी भावना के आधार पर भविष्य की स्वस्थ, सकारात्मक और जनहितकारी राजनीति का खाका तैयार किया जाना चाहिए।
अपराध, भ्रष्टाचार और महंगाई से त्रस्त है जनता
सरयू राय ने कहा कि आज आम नागरिक केवल हत्या, लूट, छिनतई, चोरी और चापड़बाजी जैसी आपराधिक घटनाओं से ही परेशान नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार, महंगाई और राजनीतिक स्तर पर बढ़ती अव्यवस्था से भी निराश है। उनके अनुसार, जनता अब स्वार्थ और गंदी प्रतिस्पर्धा पर आधारित राजनीति से ऊब चुकी है और वह सिद्धांतों एवं मूल्यों पर आधारित राजनीतिक नेतृत्व चाहती है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं का दायित्व है कि वे व्यक्तिगत हितों और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर जनसेवा और नैतिक मूल्यों पर आधारित राजनीति को मजबूत करें। यदि ऐसा किया जाता है तो जनता निश्चित रूप से उसका सम्मान करेगी और उसे अपना समर्थन देगी।
गांधी, लोहिया, दीनदयाल और जयप्रकाश की विचारधारा को बताया प्रासंगिक
सरयू राय ने कहा कि देश के पास महात्मा गांधी, डॉ. राम मनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसी महान विभूतियों की समृद्ध वैचारिक विरासत है। स्वतंत्र भारत की राजनीति को इन्हीं मूल्यों और सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए था, लेकिन बीते कुछ दशकों में यह वैचारिक धारा राजनीतिक जीवन से धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई।
उन्होंने कहा कि जमशेदपुर बंद से निकला जनसंदेश इन मूल्यों को फिर से जीवंत करने का अवसर प्रदान करता है। जनता परिवर्तन के लिए तैयार है और अब राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे इस भावना को समझें तथा अपने आचरण और संगठनात्मक कार्यशैली में उसे प्रतिबिंबित करें।
नैतिक राजनीति को मजबूत करने का दिया संदेश
सरयू राय ने अपने बयान के अंत में कहा कि वर्तमान समय में “नैतिक राजनीति बनाम राजनीतिक रणनीति” के अंतर को समझना और कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दल सिद्धांत आधारित राजनीति को प्राथमिकता देंगे, तो नए समर्थक और समर्पित कार्यकर्ता भी उसी विचारधारा से जुड़ेंगे।
उन्होंने सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे जमशेदपुर बंद से मिले संदेश को केवल एक राजनीतिक घटना के रूप में न देखें, बल्कि इसे जनभावनाओं का प्रतिबिंब मानते हुए जनहित और नैतिक मूल्यों पर आधारित राजनीति की दिशा में आगे बढ़ें।




