
जमशेदपुर : निजी विद्यालयों के संगठन पासवा ने रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार, मोरहाबादी में आयोजित अपने 14वें शिक्षक सम्मान समारोह में 2500 से अधिक शिक्षकों को सम्मानित कर एक बार फिर शिक्षा जगत में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे शिक्षाविदों, प्रोफेसरों, लेक्चररों, सरकारी एवं निजी विद्यालयों के शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधकों की मौजूदगी में आयोजित समारोह में गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव देखने को मिला।
समारोह में शिक्षकों को शॉल, प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य, पुलिस और विश्वविद्यालय जगत से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।
राज्यभर से पहुंचे शिक्षक और शिक्षाविद
रांची के आर्यभट्ट सभागार में आयोजित इस समारोह में बोकारो, हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, पलामू, गढ़वा, गिरिडीह, लोहरदगा सहित झारखंड के विभिन्न जिलों से शिक्षक और शिक्षाविद पहुंचे। राज्यभर के 500 से अधिक निजी एवं सरकारी विद्यालयों के प्राचार्यों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
समारोह में विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर काम करने का संकल्प भी लिया गया।
समारोह में मौजूद रहीं प्रमुख हस्तियां
शिक्षक सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह रहे। डीजी रेलवे अनिल पालटा ने समारोह का उद्घाटन किया। पासवा के मुख्य संरक्षक सह विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव स्वागताध्यक्ष रहे।
कार्यक्रम में रिम्स निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा, रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अजीत कुमार सिन्हा, डीएवी के निदेशक एम.के. सिन्हा, पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे, पासवा उपाध्यक्ष लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ. राजेश गुप्ता और फलक फातिमा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

श्रद्धांजलि से शुरू हुआ समारोह
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एवं पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।
इसके बाद विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। सेक्रेड हार्ट स्कूल, कोलकाता पब्लिक स्कूल और सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बीजू पाड़ा के छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने सभागार में मौजूद अतिथियों और शिक्षकों का मन मोह लिया।
इसके उपरांत अजय कुमार सिंह, अनिल पालटा, डॉ. रामेश्वर उरांव, पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे, उपाध्यक्ष लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ. राजेश गुप्ता और फलक फातिमा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।

शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य निर्माता: अजय कुमार सिंह
मुख्य अतिथि स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक समाज की ऐसी शक्ति हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को संवारने का काम करते हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी, राजनेता या किसी भी क्षेत्र में सफल व्यक्ति के निर्माण में किसी न किसी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक सम्मान महज औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज की ओर से गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। पासवा की ओर से इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों को सम्मानित किया जाना शिक्षा जगत के प्रति सम्मान की सराहनीय पहल है।
अजय कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को आकार देते हैं। एक शिक्षक की भूमिका विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका प्रभाव समाज और राष्ट्र के निर्माण तक जाता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के पीछे किसी न किसी गुरु का मार्गदर्शन अवश्य रहा है। ऐसे में गुरुजनों का सम्मान करना सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।

शिक्षक राष्ट्र की भावी पीढ़ी को गढ़ने वाले शिल्पकार: डॉ. रामेश्वर उरांव
पासवा के मुख्य संरक्षक एवं विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान देने का काम नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र और भविष्य का निर्माण करते हैं। शिक्षक समाज को दिशा देने के साथ राष्ट्र की नई पीढ़ी तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों के शिक्षक झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका समर्पण और मेहनत सराहनीय है। गुरु का सम्मान वास्तव में समाज और राष्ट्र का सम्मान है।

जीवन की सफलता में शिक्षकों की भूमिका अहम: अनिल पालटा
डीजी रेलवे अनिल पालटा ने कहा कि व्यक्ति जीवन में कितनी भी ऊंचाई हासिल कर ले, वह अपने गुरुजनों के योगदान को कभी नहीं भूल सकता। उनके अनुसार जीवन में मिली सफलता में शिक्षकों के मार्गदर्शन और योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला, अनुशासन और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं। समाज में गुरु का स्थान हमेशा सर्वोच्च रहेगा।

2500 से अधिक शिक्षकों का सम्मान पासवा के लिए गौरव का क्षण: आलोक कुमार दूबे
पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने कहा कि एक साथ 2500 से अधिक शिक्षकों को सम्मानित करना संगठन के लिए गौरव का क्षण है। पासवा हर वर्ष शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित कर गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करता है और आने वाले समय में इस अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान पूरे समाज का सम्मान है। निजी विद्यालयों के शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर शैक्षणिक परिणाम देने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। उनके योगदान के अनुरूप उन्हें सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण मिलना चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि पासवा शिक्षा जगत से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहा है। भविष्य में भी शिक्षकों और विद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए संगठन मजबूती से काम करेगा। उन्होंने सरकार से निजी विद्यालयों के शिक्षकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की।
शिक्षा राष्ट्र के विकास की बुनियाद: अजीत कुमार सिन्हा
रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र के विकास की बुनियाद है और शिक्षक इस व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षक अपने ज्ञान और अनुभव के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को तैयार करते हैं।
उन्होंने पासवा के शिक्षक सम्मान समारोह को शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
गुरु का स्थान भारतीय संस्कृति में सर्वोच्च: अंजनी श्रीवास्तव
रांची विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति अंजनी श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शिक्षक विद्यार्थियों को केवल विषय का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण भी करते हैं।
उन्होंने निजी विद्यालयों के शिक्षकों के योगदान को सम्मान दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शिक्षकों का सम्मान शिक्षा के गौरव को बढ़ाता है: एम.के. सिन्हा
डीएवी निदेशक एम.के. सिन्हा ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की गुणवत्ता उसके शिक्षकों से तय होती है। शिक्षकों का सम्मान वास्तव में शिक्षा और ज्ञान की पूरी परंपरा का सम्मान है। उन्होंने पासवा के आयोजन को शिक्षकों का मनोबल बढ़ाने वाली पहल बताया।
नई पीढ़ी के भविष्य निर्माता हैं शिक्षक: डॉ. डी.के. सिन्हा
रिम्स निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा ने कहा कि शिक्षक नई पीढ़ी के भविष्य निर्माता हैं। विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने सरकारी और निजी विद्यालयों के शिक्षकों के योगदान की सराहना की।
शिक्षकों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी: डॉ. राजेश गुप्ता
पासवा के महासचिव डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और अनुभव से विद्यार्थियों को जीवन की सही दिशा प्रदान करते हैं। समाज में शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता है। पासवा इस दिशा में लगातार प्रयास करता रहेगा।
गुरुजनों का सम्मान हमारी संस्कृति और संस्कार: फलक फातिमा
पासवा की महासचिव फलक फातिमा ने कहा कि शिक्षक हमारे जीवन के ऐसे मार्गदर्शक हैं, जिनका प्रभाव विद्यार्थी के पूरे जीवन पर रहता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके योगदान के प्रति समाज में हमेशा सम्मान और कृतज्ञता का भाव रहना चाहिए।

शिक्षकों का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता: सच्चिदानंद तिग्गा
जैक सचिव सच्चिदानंद तिग्गा ने कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के पीछे किसी न किसी शिक्षक का मार्गदर्शन जरूर होता है। शिक्षक राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार करते हैं। पासवा की ओर से इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों को सम्मानित किया जाना सराहनीय और अनुकरणीय पहल है।
लाल किशोर नाथ शाहदेव ने किया संचालन
समारोह का सफल संचालन पासवा के उपाध्यक्ष लाल किशोर नाथ शाहदेव ने किया। उनके प्रभावी संचालन से समारोह गरिमामय और जीवंत बना रहा। कार्यक्रम के अंत में अल्ताफ अंसारी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यालय प्रबंधन, विद्यार्थियों और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
ये शिक्षाविद भी हुए सम्मानित
समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षकों और शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- डॉ. नवाजिश – प्राचार्य, मदर जीरमानी बी.एड. कॉलेज
- समीर गुंजन लकड़ा – सहायक प्राध्यापक
- विनोद कुमार – सहायक प्राध्यापक
- संतोषी – सहायक प्राध्यापक
- आर. के. झा – एसोसिएट प्रोफेसर, विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग
- डॉ. चंचल लकड़ा – सहायक प्राध्यापक
- डॉ. सुरेश कुमार सामद – सहायक प्राध्यापक
- डॉ. नीलू प्रिया तिर्की – सहायक प्राध्यापक
- अमित कुमार – सहायक प्राध्यापक
- अनुभव कुमार – एसोसिएट प्रोफेसर, मारवाड़ी कॉलेज
- अनीता सिन्हा – सहायक प्राध्यापक, विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग
इसके अलावा विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग से जुड़े शिक्षाविदों सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों एवं प्राध्यापकों को भी सम्मानित किया गया।
पासवा वॉलिंटियर्स ने निभाई अहम भूमिका
समारोह को सफल बनाने में पासवा के वॉलिंटियर्स का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। इनमें मो. जिन्ना, नीरज कुमार, मिंकु प्रसाद, रशीद अंसारी, मेघाली सेनगुप्ता, बीना देवी, रमण झा, सुभाष उपाध्याय, प्रमोद कुमार, मेहुल दूबे, आरजू शबा, अंकिता सिंह, श्रुति तिवारी, अनुष्का कुमारी, ऋचा कुमारी, बुलबुल कुमारी, खुशी भारती, वीणा कुमारी, रानी कुमारी, ऐश्वर्या सिंह, स्वाति कुमारी, साइन शिवम, अनुभव शंकर, साक्षी कुमारी, प्रवीण उरांव, शिवानी तिवारी, अमित लकड़ा, फैजान रजा, कामरान खान, खालिद राजा, मेघा राज, सक्षम कुमार, आयुष कुमार, अंजली कुमारी, अनुराग जायसवाल, आकाश कुमार महतो, रिशु कुमार, विक्रांत सहाय, मोहम्मद शाहिद और मो. रजा उल्लाह शामिल रहे।
शिक्षक सम्मान के जरिए दिया शिक्षा और संस्कार का संदेश
समारोह के दौरान पूरे सभागार में शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया। पासवा ने अपने 14वें शिक्षक सम्मान समारोह के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है।
2500 से अधिक शिक्षकों का एक मंच पर सम्मान न केवल शिक्षकों के योगदान की स्वीकार्यता का प्रतीक बना, बल्कि इस आयोजन ने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया। पासवा ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में शिक्षक सम्मान अभियान को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।




