
रेल यात्रियों की समस्याओं पर संघर्ष जारी रहेगा, समिति ने आंदोलन को रखा सक्रिय
जमशेदपुर : जमशेदपुर में रेल यात्रियों की लगातार बढ़ती परेशानियों और ट्रेनों की लेट लतीफी पर विधायक सरयू राय के आवासीय कार्यालय में आयोजित रेल यात्री संघर्ष समिति की महत्वपूर्ण बैठक में निर्णय लिया गया कि समिति पूर्ववत सक्रिय रहकर रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर निगरानी बनाए रखेगी।
बैठक में दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक (जीएम) द्वारा आंदोलन की प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। समिति ने रेलवे जीएम के साथ-साथ आंदोलन को समर्थन देने वाले सामाजिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक और राजनीतिक संगठनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता नहीं देने की होगी निगरानी
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि रेलवे जीएम ने आश्वासन दिया है कि अब यात्री ट्रेनों को खड़ा कर मालगाड़ियों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। संघर्ष समिति ने कहा कि वह इस घोषणा के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि यात्रियों को भविष्य में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
समिति के सदस्यों ने कहा कि जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में रेल यात्रियों की समस्याएं लंबे समय से उपेक्षित रही हैं। ऐसे में आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक रेलवे व्यवस्था में वास्तविक सुधार दिखाई नहीं देता।
जनसंपर्क इंस्पेक्टर की नियुक्ति पर भी रहेगी नजर
बैठक के दौरान यह भी चर्चा हुई कि रेलवे जीएम ने डीआरएम को एक जनसंपर्क इंस्पेक्टर नियुक्त करने का निर्देश दिया है। समिति ने कहा कि वह इस अधिकारी की कार्यप्रणाली और यात्रियों की शिकायतों के समाधान पर भी लगातार नजर रखेगी।
संघर्ष समिति ने दोहराया कि ट्रेनों की समय पालन व्यवस्था सुधारने और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित कराने के लिए उसका अभियान पहले की तरह जारी रहेगा।
जमशेदपुर की उपेक्षा पर उठे गंभीर सवाल
बैठक में समिति ने रेलवे जीएम की उस स्वीकारोक्ति को गंभीरता से लिया, जिसमें उन्होंने माना कि पिछले दस वर्षों में जमशेदपुर के आसपास रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए कोई बड़ा कार्य नहीं हुआ।
समिति ने सवाल उठाया कि जब देशभर में 2016-17 से अब तक रेलवे और स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर खरबों रुपये खर्च किए गए, तब जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर की लगातार अनदेखी क्यों की गई। सदस्यों ने पूछा कि जिन योजनाओं की घोषणा अब की जा रही है, वे बीते वर्षों में क्यों नहीं बनाई गईं।
बैठक में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते रेलवे ढांचे का विस्तार हुआ होता, तो आज ट्रेनों की लेटलतीफी और यात्रियों की परेशानियां इतनी गंभीर नहीं होतीं।
राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति पर जताया अफसोस
रेल यात्री संघर्ष समिति ने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि आंदोलन में शामिल होने के लिए सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन आजसू और जदयू को छोड़कर कोई अन्य दल आगे नहीं आया।
हालांकि, चैंबर ऑफ कॉमर्स, मारवाड़ी सम्मेलन और कुछ अन्य व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति को सराहनीय बताया गया। समिति ने इन संगठनों के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।


सांसद जोबा मांझी ने दिया समर्थन का आश्वासन
बैठक के दौरान विधायक सरयू राय ने पश्चिम सिंहभूम की सांसद जोबा मांझी से दूरभाष पर बातचीत की। सांसद ने आंदोलन को पूरा समर्थन देने और समिति की मांगों को गंभीरता से लागू कराने के लिए रेलवे जीएम से बातचीत करने का भरोसा दिया।
उन्होंने कहा कि यदि रेलवे प्रशासन की ओर से उन्हें पूर्व सूचना दी जाती, तो वे स्वयं बैठक में शामिल होतीं।
समीक्षा बैठक में ये लोग रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में रेल यात्री संघर्ष समिति के संयोजक शिव शंकर सिंह, आजसू जिला अध्यक्ष कन्हैया सिंह, जदयू जिला अध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव, जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष अजय कुमार, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष नीरज सिंह तथा अमित शर्मा सहित कई लोग उपस्थित रहे।





