
ग्रेड रिवीजन के बाद कैंटीन शुल्क बढ़ोतरी ने बढ़ाई बेचैनी, यूनियन की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
जमशेदपुर। टीएसडीपीएल कर्मचारियों के मासिक खर्च में अब कैंटीन शुल्क की वजह से भी इजाफा होगा। कंपनी प्रबंधन की ओर से जारी नोटिस के अनुसार कर्मचारियों का मासिक कैंटीन चार्ज 250 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये कर दिया गया है। यानी कर्मचारियों पर प्रति माह 100 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा है, जो पुराने शुल्क के मुकाबले 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
कैंटीन शुल्क में इस वृद्धि के बाद कर्मचारियों के बीच नाराजगी का माहौल है। कर्मचारियों का कहना है कि उनसे सीधे जुड़े इस तरह के फैसले से पहले यूनियन प्रतिनिधियों और कैंटीन कमेटी के साथ स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए थी। कर्मचारियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि शुल्क बढ़ाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और बढ़ी हुई राशि के बदले कैंटीन सुविधाओं में किस तरह का सुधार किया जाएगा।

कैंटीन चार्ज बढ़ोतरी पर कर्मचारियों में अलग-अलग राय
कैंटीन शुल्क में 100 रुपये की बढ़ोतरी को लेकर कर्मचारियों के बीच कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कैंटीन शुल्क बढ़ाने का फैसला ग्रेड समझौते के दौरान ही तय कर लिया गया था। वहीं, कर्मचारियों के दूसरे वर्ग का तर्क है कि यदि कैंटीन की गुणवत्ता में सुधार के लिए शुल्क बढ़ाया गया है तो इस संबंध में कैंटीन कमेटी और यूनियन के साथ चर्चा होनी चाहिए थी।
कर्मचारियों का एक वर्ग 250 रुपये से 350 रुपये हुए शुल्क को अतिरिक्त आर्थिक बोझ के रूप में देख रहा है। वहीं, कुछ कर्मचारी इसे प्रबंधन का एकतरफा फैसला बता रहे हैं। इसी वजह से कैंटीन शुल्क बढ़ोतरी का मुद्दा अब कर्मचारियों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
बढ़े शुल्क के बदले सुविधाओं पर भी उठे सवाल
कर्मचारियों के बीच यह सवाल भी है कि यदि कैंटीन शुल्क बढ़ाया गया है तो इसके बदले भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और अन्य सुविधाओं में कितना सुधार होगा। कर्मचारियों का कहना है कि शुल्क बढ़ोतरी के साथ सुविधाओं में पारदर्शी सुधार दिखाई देना चाहिए।
यूनियन नेता खेल रहे है वॉट्सएप वॉट्सएप
कैंटीन शुल्क बढ़ोतरी के बाद यूनियन की भूमिका को लेकर भी कर्मचारियों में सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि इस मुद्दे पर यूनियन पदाधिकारियों की सक्रियता मुख्य रूप से व्हाट्सऐप ग्रुपों में दिखाई दे रही है, जबकि कर्मचारियों के साथ सीधे संवाद की अपेक्षा की जा रही है।
व्हाट्सऐप चर्चाओं में इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की बात कही जा रही है। किसी की ओर से कहा जा रहा है कि कैंटीन शुल्क बढ़ोतरी ग्रेड समझौते में ही तय हो चुकी थी। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि कैंटीन की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से शुल्क बढ़ाया गया है।
कर्मचारियों के एक वर्ग ने इस फैसले को प्रबंधन का एकतरफा और कथित तौर पर तानाशाहीपूर्ण निर्णय भी बताया है। वहीं, व्हाट्सऐप ग्रुपों में मामले को लेकर तीखी और व्यंग्यात्मक टिप्पणियां भी चर्चा में हैं। इससे कर्मचारियों के बीच यूनियन के रुख को लेकर असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ने की बात कही जा रही है। कुछ इसमें चूड़ी बजाने तो कुछ कैंटीन कमेटी के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं तो कुछ इसे यूनियन की विफलता भी बता रहे हैं।
ग्रेड रिवीजन को लेकर पहले से असंतोष
कैंटीन शुल्क बढ़ोतरी का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है, जब टीएसडीपीएल कर्मचारियों के एक वर्ग में हालिया ग्रेड रिवीजन को लेकर पहले से ही असंतोष की चर्चा है।
कर्मचारियों का कहना है कि ग्रेड ड्यू होने के समय ही यदि समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाता तो शायद कर्मचारियों को मौजूदा परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। कर्मचारियों के एक वर्ग का मानना है कि ग्रेड समझौता उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा।
छह साल की जगह सात साल हुई ग्रेड अवधि
कर्मचारियों के मुताबिक, नए ग्रेड समझौते में ग्रेड की अवधि छह वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष कर दी गई है। वहीं, वेतन में हुई बढ़ोतरी को भी कर्मचारियों का एक वर्ग अपेक्षा से कम मान रहा है।
इसी वजह से ग्रेड रिवीजन के बाद यूनियन नेतृत्व को लेकर भी कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि ग्रेड समझौता अधिक बेहतर आर्थिक लाभ और अपेक्षाकृत कम अवधि में होगा।

पुराने ग्रेड को लेकर पीके साहू की चर्चा
ग्रेड रिवीजन से असंतुष्ट कर्मचारियों के बीच कंपनी के पूर्व वरीय महाप्रबंधक पीके साहू का नाम भी चर्चा में आ रहा है।
कुछ कर्मचारी उनके कार्यकाल में हुए ग्रेड समझौते को याद करते हुए उसे आज भी बेहतर और यादगार बताते हैं। कर्मचारियों का यह वर्ग मौजूदा ग्रेड की तुलना पुराने समझौते से कर रहा है और इसी आधार पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है।

ग्रेड की नाराजगी का असर, राकेश्वर पांडे के अभिनंदन से दूरी
ग्रेड रिवीजन को लेकर कर्मचारियों की कथित नाराजगी का असर यूनियन की परंपरागत गतिविधियों पर भी दिखाई देने की बात कही जा रही है।
कर्मचारियों के अनुसार, आम तौर पर ग्रेड रिवीजन या बोनस समझौते के बाद यूनियन अध्यक्ष राकेश्वर पांडे का कर्मचारियों की ओर से जोरदार अभिनंदन किया जाता रहा है। इसे यूनियन और कर्मचारियों के बीच हुए समझौते की स्वीकार्यता और खुशी के तौर पर देखा जाता रहा है।
लेकिन इस बार कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग द्वारा राकेश्वर पांडे के अभिनंदन से दूरी बनाए रखने की बात कही जा रही है। कर्मचारियों के बीच इसे हालिया ग्रेड रिवीजन को लेकर असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
कैंटीन चार्ज और ग्रेड रिवीजन पर बढ़ी चर्चा
टीएसडीपीएल में इस समय कर्मचारियों के बीच दो मुद्दे खास तौर पर चर्चा में हैं—कैंटीन शुल्क में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी और हालिया ग्रेड रिवीजन।
कर्मचारियों का कहना है कि कैंटीन शुल्क बढ़ाने से पहले प्रबंधन और यूनियन को कर्मचारियों के साथ स्पष्ट संवाद करना चाहिए था। साथ ही ग्रेड रिवीजन के परिणामों को लेकर कर्मचारियों के बीच मौजूद असंतोष पर भी यूनियन नेतृत्व को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कर्मचारियों के एक वर्ग की मांग है कि यूनियन नेतृत्व कैंटीन शुल्क बढ़ोतरी पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखे और प्रबंधन के साथ बातचीत कर इस फैसले पर पुनर्विचार की पहल करे।
फिलहाल कैंटीन चार्ज में बढ़ोतरी और ग्रेड रिवीजन दोनों मुद्दे टीएसडीपीएल कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रबंधन और यूनियन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।





