
सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की कार्यशैली पर उठे सवाल, पर्यावरण को लेकर चेतावनी
पृथ्वी दिवस के अवसर पर आयोजित हुई महत्वपूर्ण संगोष्ठी
जमशेदपुर : पृथ्वी दिवस के अवसर पर रांची आयोजित एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण, विकास की दिशा और सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की कार्यसंस्कृति पर गंभीर सवाल उठाए गए। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज पर्यावरण को लेकर सबसे अधिक जागरूक होने की जरूरत आम जनता को नहीं, बल्कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों, नौकरशाहों और तथाकथित मेधावी मस्तिष्कों को है।पुरानी विधानसभा के सभागार में युगांतर भारती और नेचर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आम आदमी पहले से ही पर्यावरणीय संकट का भुक्तभोगी है, लेकिन नीति निर्धारकों की कार्यशैली अब भी सवालों के घेरे में है।

सस्टेनेबल नहीं, शाश्वत विकास की जरूरत : सरयू राय
सरयू राय ने कहा कि वर्तमान समय में जिस तरह का विकास मॉडल अपनाया जा रहा है, वह दीर्घकाल में विनाशकारी साबित हो सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “सस्टेनेबल डेवलपमेंट” की जगह “शाश्वत विकास” को अपनाने की आवश्यकता है।उन्होंने औद्योगिक क्रांति के चौथे चरण—आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस—का जिक्र करते हुए चेताया कि तकनीक का अंधाधुंध उपयोग हमें संकट की ओर ले जा सकता है। उनके शब्दों में, “टेक्नोलॉजी एक अच्छा सेवक है, लेकिन खराब मालिक साबित हो सकती है।
”प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर चिंता
उन्होंने भूमिगत खनन और पृथ्वी के भीतर गहराई तक किए जा रहे प्रयोगों पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि इस तरह के हस्तक्षेप का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।उन्होंने यह भी कहा कि समाज में “शुभ-लाभ” की जगह “लोभ-लाभ” की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो पर्यावरणीय संकट को और गहरा कर रही है।
2047 तक 11 मिलियन टन सोलर वेस्ट का खतरा : अंशुल शरण
युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने कार्यक्रम का विषय प्रस्तुत करते हुए कहा कि पृथ्वी का बिगड़ता संतुलन पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।उन्होंने चेतावनी दी कि वर्ष 2047 तक सोलर वेस्ट 11 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जिसका प्रबंधन एक बड़ी वैश्विक चुनौती होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि इस वर्ष वैश्विक तापमान में 0.3 डिग्री की वृद्धि का अनुमान है, जो खतरे का संकेत है।
प्राचीन ग्रंथों में पर्यावरण संरक्षण के सूत्र: डॉ एम के जमुआर
झारखंड रक्षा शक्ति के पूर्व कुल सचिव डॉ एम के जमुआर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांत हमारे 5000 वर्ष पुराने वैदिक ग्रंथों में पहले से मौजूद हैं।उन्होंने कहा कि अथर्ववेद में जल, वनस्पति और वायु की शुद्धता को जीवन का आधार बताया गया है। लेकिन विडंबना यह है कि आधुनिक समाज अपनी जड़ों से दूर होता जा रहा है और पश्चिमी प्रभाव में अपनी सांस्कृतिक विरासत को भूल रहा है।
सरकार और जनता के बीच समन्वय की कमी : ओम सिंह
वरिष्ठ पर्यावरणविद् ओम सिंह ने कहा कि विश्व पृथ्वी दिवस का उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय खतरों से पृथ्वी को बचाना है।उन्होंने बताया कि 190 से अधिक देश इस मुहिम से जुड़े हैं, लेकिन अपेक्षित सफलता अब तक नहीं मिल सकी है। इसका मुख्य कारण सरकार और आम जनता के बीच समन्वय की कमी है।परिचर्चा में कई विशेषज्ञों ने रखे विचार कार्यक्रम के दौरान एक विस्तृत परिचर्चा सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें राधेश्याम अग्रवाल, सुरेंद्र सिन्हा, गोविंद मेवाड़, देवेंद्र सिंह, अश्विनी दराद, बिरेन्द्र सिंह, बालकृष्णा सिंह, प्रमोद सिंह, उदय सिंह, अरुण राय, सुमन सिंह, संजय सिंह, चंद्रकिशोर पांडेय, दिलीप अम्बष्ट, शिवपूजन चौहान और सुनील कुमार सहित कई प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम का संचालन भारतेंदु झा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन धर्मेंद्र तिवारी ने प्रस्तुत किया।





