
गलत जवाब देने वाले अधिकारियों पर हो कड़ी कार्रवाई: सरयू राय
जमशेदपुर : झारखंड की सियासत में एक बार फिर कथित अश्लील वीडियो प्रकरण को लेकर हलचल तेज हो गई है। जमशेदपुर पश्चिम से विधायक सरयू राय ने इस मामले में विधानसभा में दिए गए सरकारी जवाब को भ्रामक बताते हुए विधानसभाध्यक्ष रविन्द्र नाथ महतो को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की है। मामला पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से जुड़ी कथित अश्लील वीडियो क्लिप से संबंधित है।
क्या है पूरा मामला?
विधायक सरयू राय ने जारी बयान में कहा कि वर्ष 2023 में खुद बन्ना गुप्ता ने कथित अश्लील सीडी मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद जब यह मुद्दा विधानसभा में उठाया गया तो सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि जांच जारी है और वीडियो क्लिप को फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) भेजा गया है।
राय के अनुसार, 21 फरवरी 2026 को उन्होंने पुनः विधानसभा में यह प्रश्न उठाया। इस बार भी सरकार की ओर से यही कहा गया कि एफएसएल की जांच रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।
हालांकि, सरयू राय का दावा है कि यह जवाब तथ्यात्मक रूप से गलत है।
एफएसएल रिपोर्ट पर उठे सवाल
सरयू राय ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के अनुसार एफएसएल की जांच रिपोर्ट लगभग आठ महीने पहले ही तैयार हो चुकी है और संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत भी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि एफएसएल अधिकारियों ने जमशेदपुर पुलिस को रिपोर्ट ले जाने के लिए सूचित किया था, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट प्राप्त नहीं की।
राय ने यह भी बताया कि एफएसएल रिपोर्ट में उल्लेख है कि वीडियो क्लिप इतनी धुंधली है कि यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि वीडियो असली है या उसमें किसी प्रकार की एडिटिंग या छेड़छाड़ की गई है।
बड़ा सवाल: वायरल वीडियो साफ, एफएसएल में धुंधली कैसे?
इस पूरे प्रकरण में सरयू राय ने एक अहम सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, तब वह स्पष्ट दिखाई दे रही थी। यदि ऐसा था, तो एफएसएल को भेजी गई वीडियो क्लिप धुंधली कैसे हो गई?
उन्होंने सवाल किया कि आखिर जमशेदपुर पुलिस ने जांच के लिए कौन-सी वीडियो क्लिप भेजी?
राय के मुताबिक, प्राथमिकी बन्ना गुप्ता द्वारा दर्ज कराई गई थी, लेकिन वीडियो क्लिप एक पेनड्राइव के माध्यम से ‘गुफरान’ नामक व्यक्ति ने पुलिस को सौंपी थी। इससे जांच की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
महिला की पहचान पर भी विवाद
विधायक ने कहा कि वीडियो में एक महिला द्वारा यह दावा किया गया था कि अश्लील बातचीत में शामिल महिला वही है। लेकिन पुलिस ने विधानसभा में जवाब दिया कि संबंधित महिला की पहचान नहीं हो सकी, इसलिए उससे जुड़ी कोई जांच नहीं की गई।
सरयू राय का कहना है कि यह भी जांच में गंभीर लापरवाही या जानबूझकर की गई चूक को दर्शाता है।
विधानसभा की अवमानना का मामला?
सरयू राय ने आरोप लगाया कि गृह विभाग लगातार गलतबयानी कर रहा है और सदन को गुमराह किया गया है। उनके अनुसार, यदि एफएसएल रिपोर्ट उपलब्ध है और इसके बावजूद सदन में “रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई” कहा गया, तो यह विधानसभा की अवमानना की श्रेणी में आता है।
उन्होंने विधानसभाध्यक्ष से आग्रह किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में सदन को गलत जानकारी देने की पुनरावृत्ति न हो।
राजनीतिक असर की संभावना, नजर विधानसभाध्यक्ष पर
यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब राज्य की राजनीति पहले से ही आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रही है। यदि एफएसएल रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच होती है, तो इसका व्यापक राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल, सभी की निगाहें विधानसभाध्यक्ष के रुख और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।



