
प्रबंधन के 10.74 लाख देने के प्रस्ताव को यूनियन ने ठुकराया
टाटा स्टील से संबद्ध संवेदक कंपनी पर बकाया वेतन, नोटिस पे और छँटनी मुआवजे का मामला
जमशेदपुर : टाटा स्टील से संबद्ध संवेदक कंपनी मेसर्स विवेक कंस्ट्रक्शन और उसके 50 कामगारों के बीच लंबे समय से लंबित वेतन, नोटिस पे तथा छँटनी मुआवजे को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर गया है। इस संबंध में आज श्रम विभाग में त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता श्रम पदाधिकारी (LS-2) श्री सतेन्द्र सिंह ने की।
बैठक में कामगार पक्ष का प्रतिनिधित्व जोहार झारखंड श्रमिक महासंघ के प्रतिनिधि और मजदूर नेता राजीव पाण्डेय ने किया। वहीं प्रबंधन पक्ष की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच बकाया भुगतान, वैधानिक देनदारियों और मुआवजे के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
₹10.74 लाख बनाम ₹50 लाख: भुगतान को लेकर मतभेद
बैठक में प्रबंधन ने लिखित रूप से कुल ₹10,74,000 (दस लाख चौहत्तर हजार रुपये) के भुगतान की तत्परता जताई। हालांकि, कामगारों की ओर से न्यूनतम ₹50,00,000 (पचास लाख रुपये) की मांग का औपचारिक दावा प्रस्तुत किया गया।
कामगार पक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रस्तावित ₹10,74,000 की राशि न तो वास्तविक बकाया वेतन का समुचित प्रतिनिधित्व करती है और न ही यह सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी दरों एवं प्रासंगिक श्रम कानूनों के अनुरूप है। श्रमिक नेताओं ने इसे अपूर्ण और अस्वीकार्य प्रस्ताव बताते हुए औपचारिक असहमति दर्ज कराई।
सौहार्दपूर्ण माहौल, लेकिन समाधान बाकी
श्रम विभाग की पहल पर हुई यह त्रिपक्षीय वार्ता सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, किंतु किसी अंतिम निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी। श्रम पदाधिकारी ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से समाधान निकालने की सलाह दी और आगे की प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। कामगारों ने उम्मीद जताई है कि आगामी बैठक में न्यायसंगत, पारदर्शी और विधिसम्मत समाधान सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे लंबे समय से लंबित भुगतान विवाद का पटाक्षेप हो सके।





