
विधायक ने जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का आग्रह किया
स्वास्थ्य विभाग पर विधानसभा के आश्वासन की अवहेलना का आरोप
जमशेदपुर : झारखंड के वरिष्ठ विधायक सरयू राय ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विभाग उनसे महत्वपूर्ण जानकारी छिपा रहा है, जबकि वे विधानसभा के वरीय सदस्य हैं। श्री राय ने आरोप लगाया कि उन्होंने दवाओं की खरीद प्रक्रिया को लेकर कई बार सवाल उठाए, लेकिन विभाग पारदर्शिता से जवाब देने से बच रहा है।
पत्र में उठाया पारदर्शिता का मुद्दा
विधायक सरयू राय ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री को एक विस्तृत पत्र लिखकर मांग की है कि राज्य में दवाओं की खरीद केवल निविदा (Tender Process) के माध्यम से की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि सरकार द्वारा भारत सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उपक्रमों (CPSUs) से ऊंची दरों पर दवाएं खरीदी जा रही हैं, जबकि अन्य राज्य इन्हीं कंपनियों से निविदा के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर खरीदारी कर रहे हैं।
जांच समिति की रिपोर्ट पर बना रहस्य
श्री राय ने बताया कि उन्होंने मार्च 2023 में विधानसभा में दवा खरीद से जुड़ा एक प्रश्न पूछा था, जिसके बाद विभाग ने एक त्रिसदस्यीय जांच समिति गठित की थी।
हालांकि, समिति की रिपोर्ट तैयार होने के बाद भी न तो विधायक को दी गई, न ही विधानसभा सचिवालय को सौंपी गई।
उन्होंने कहा कि उन्होंने 2 सितंबर 2024 और 3 जून 2025 को विभागीय सचिव को पत्र लिखकर रिपोर्ट की प्रति मांगी, परंतु कोई जवाब नहीं मिला। यहां तक कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी का भी उन्हें “हास्यास्पद उत्तर” दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की ‘अवहेलना’ पर सवाल
सरयू राय ने कहा कि विधानसभा में तीन बार प्रश्न पूछे जाने और समिति गठित होने के बावजूद रिपोर्ट छुपाई जा रही है।
उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि विभाग विधानसभा के प्रति जवाबदेही निभाने में विफल हो रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग ने जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही फिर से भारत सरकार के लोक उपक्रमों से ऊंची दरों पर दवाएं खरीदने का आदेश जारी कर दिया, जो पारदर्शिता के विपरीत है।
दवा की कीमतें कम करने की कोशिश क्यों नहीं?’
पत्र में श्री राय ने यह सवाल भी उठाया कि जब दवा कंपनियां लागत से 10 गुना अधिक कीमतों पर दवाएं बेचती हैं, तो विभाग ने उनसे दाम कम करने की पहल क्यों नहीं की?
उनका कहना है कि झारखंड सरकार को अन्य राज्यों की तरह खुली निविदा प्रक्रिया अपनानी चाहिए, ताकि राज्य को सस्ती दवाएं मिल सकें और सरकारी धन की बचत हो।



