नियमावली सार्वजनिक हो, तभी दूर होगा असमंजस
जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पेसा (PESA) नियमावली को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली जैसे गंभीर और संवैधानिक विषय को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, जो संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।
यहां जारी एक बयान में सरयू राय ने कहा कि सरकार और विपक्ष—दोनों पक्षों की ओर से आ रही प्रतिक्रियाएं राजनीति से प्रेरित प्रतीत होती हैं, जबकि यह विषय गहन संवैधानिक विमर्श का है।
वर्षों बाद बनी नियमावली, यह सकारात्मक पहल
अब केवल संवैधानिक कसौटी पर परख जरूरी
सरयू राय ने कहा कि पेसा अधिनियम पारित होने के कई वर्षों बाद तक नियमावली नहीं बन पाने के कारण राज्य में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
उन्होंने कहा, “वर्तमान सरकार द्वारा पेसा नियमावली बनाए जाने से यह असमंजस समाप्त हुआ है। अब आवश्यकता केवल इस बात की है कि यह देखा जाए कि नियमावली संविधान और कानून की भावना के अनुरूप है या नहीं।”
कमी हो तो संशोधन संभव: सरयू राय
आलोचना के बजाय वैधानिक सुझाव दें
विधायक सरयू राय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने अपने विवेक से पेसा नियमावली बनाई है। यदि इसमें कोई कमी है या यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है, तो संशोधन किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि नियमावली की कमियों को रेखांकित कर सरकार के संज्ञान में लाया जाना चाहिए, ताकि आवश्यक संशोधन संभव हो सकें।
पेसा का उद्देश्य: अधिसूचित क्षेत्रों में प्रभावी पंचायती राज
स्वशासन और सुशासन को मजबूत करना लक्ष्य
सरयू राय ने कहा कि पेसा नियमावली का मूल उद्देश्य अधिसूचित (अनुसूचित) क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था को वहां की सामाजिक और प्रशासनिक विशेषताओं के अनुरूप लागू करना है।
यह प्रावधान भारत के संविधान में निहित है, जिसके आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों ने पेसा अधिनियम पारित किया है।
उन्होंने कहा कि अधिसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज के प्रावधान स्थानीय प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप होने चाहिए—यही पेसा कानून और उसकी नियमावली की आत्मा है।
नियमावली सार्वजनिक हो, तभी सार्थक विमर्श संभव
राजनीतिक समर्थन या विरोध से नहीं सुलझेगा मामला
सरयू राय ने सरकार से आग्रह किया कि पेसा नियमावली को सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा, “जिन लोगों को इसमें कमियां दिखाई देती हैं, वे उन्हें चिन्हित करें। तभी नियमावली को संविधान और कानून की भावना के अनुरूप बेहतर बनाया जा सकेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी नियमावली में संशोधन की गुंजाइश हमेशा रहती है। पेसा नियमावली की समीक्षा सरकार के भीतर, न्यायपालिका के समक्ष और विधानसभा की प्रासंगिक समिति के माध्यम से की जा सकती है। ये सभी वैधानिक मार्ग हैं।





