हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सरकार से पुनः अध्ययन की मांग
जमशेदपुर: प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (PASWA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने एक अहम प्रेस वार्ता में कहा है कि 2019 के पहले स्थापित निजी विद्यालयों पर आरटीई अधिनियम 2019 (संशोधित) लागू नहीं होता। उन्होंने माननीय झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए सरकार से आग्रह किया है कि वह इस विषय पर फिर से गंभीरता से अध्ययन करे।
हाईकोर्ट आदेश की प्रमुख बातें
आलोक कुमार दूबे ने संवाददाताओं को कोर्ट के फैसले की प्रमाणिक प्रति सौंपते हुए स्पष्ट किया कि:
✅ पॉइंट नंबर 51 (III), पेज 18:
सरकार ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि 2019 के पहले स्थापित निजी स्कूलों पर RTE 2019 का संशोधन लागू नहीं होता।
✅ पॉइंट नंबर 51 (IV):
संशोधित आरटीई अधिनियम 2019 केवल 2019 के बाद स्थापित निजी और सरकारी दोनों प्रकार के विद्यालयों पर ही लागू होता है।
कोर्ट के आदेश की अवहेलना न करें सरकार : पासवा
पासवा अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि सरकार 2019 से पहले खुले निजी विद्यालयों से संशोधित आरटीई अधिनियम के तहत मान्यता का आवेदन मांगती है, तो यह माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि:
2019 से पहले के स्कूल पुराने RTE 2009 के तहत आवेदन करेंगे
2019 के बाद के स्कूल नए संशोधित नियमों के तहत आवेदन करेंगे
🏛️ सरकारी स्कूलों पर भी संशोधन लागू नहीं
आलोक दूबे ने यह भी कहा कि चूंकि अधिकांश सरकारी स्कूल भी 2019 से पहले खुले हैं, इसलिए संशोधित RTE अधिनियम न तो उन पर लागू होता है, और न ही उन निजी स्कूलों पर जो 2019 से पहले स्थापित हुए हैं।
📢 शिक्षा सचिव को दी गई सलाह
आलोक कुमार दूबे ने झारखंड के माननीय शिक्षा सचिव से आग्रह किया है कि वे उच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन करें और उसी के अनुरूप निजी विद्यालयों के लिए मान्यता से संबंधित निर्देश जारी करें। उन्होंने कहा:
“हम झारखंड के 2019 से पहले स्थापित सभी निजी विद्यालयों को यह भरोसा दिलाते हैं कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। PASWA हर स्थिति में उनके साथ खड़ा है। वे केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करें।”



