सोनारी एयरपोर्ट पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया स्वागत

जनजातीय संस्कृति और भाषा के सम्मान का दिया सशक्त संदेश
जमशेदपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने तीन दिवसीय झारखंड दौरे के दूसरे दिन लौह नगरी जमशेदपुर पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने करनडीह स्थित जाहेर थान में विधिवत पूजा-अर्चना की और इसके पश्चात ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष समारोह में शिरकत कर जनजातीय भाषा और संस्कृति को सम्मान दिया।
सोनारी एयरपोर्ट पर उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने भी फूलों के गुलदस्ते के साथ उनका स्वागत किया।

गुरु गोमके की प्रतिमा पर माल्यार्पण, जाहेर थान में की आराधना

जमशेदपुर आगमन के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सीधे करनडीह जाहेर थान पहुंचीं। यहां उन्होंने संताल समाज के इष्ट देवों की पूजा की और ओलचिकी लिपि के प्रणेता गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उन्होंने संताली भाषा में देवों की आराधना कर सांस्कृतिक एकात्मता का संदेश दिया।
पोटका विधायक संजीव सरदार ने किया राष्ट्रपति का स्वागत

ओलचिकी लिपि शताब्दी समारोह में राष्ट्रपति ने की सहभागिता
राष्ट्रपति जाहेर थान समिति और ऑल इंडिया रायटर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूर्ण होने के समारोह में शामिल हुईं।
समारोह में राष्ट्रपति ने ओलचिकी लिपि के विकास और प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले 12 लेखकों एवं अन्य विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया।
संथाली भाषा को पहचान दिलाने में ओलचिकी लिपि का अहम योगदान
उल्लेखनीय है कि ओलचिकी लिपि ने संथाली भाषा को एक विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसे ओल चेमेट, ओल सिकी और संथाली वर्णमाला भी कहा जाता है।
वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने इस लिपि का प्रणयन किया था।
यह लिपि बाएं से दाएं लिखी जाती है और इसमें 30 अक्षर हैं।
आज ओलचिकी लिपि का प्रयोग झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम सहित देश के कई राज्यों में हो रहा है।

ओलचिकी लिपि के विस्तार के लिए अहम घोषणा
समारोह को संताली भाषा में संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि
“ओलचिकी लिपि ने संथाली भाषा और संताली समाज के सामाजिक व सांस्कृतिक विकास में बड़ा योगदान दिया है।”
उन्होंने यह भी घोषणा की कि बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों के नाम अब ओलचिकी लिपि में भी अंकित किए जाएंगे, जिससे इस लिपि को और व्यापक पहचान मिलेगी।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने भी रखे विचार
इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि यह समारोह जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति और कला का उत्सव है।
उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को महिला सशक्तिकरण की जीवंत प्रतीक बताते हुए कहा कि वे देश की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
राज्यपाल ने ओलचिकी को संताली समाज की वैचारिक प्रेरणा का प्रतीक बताते हुए कहा कि लोक संस्कृति के संरक्षण में सहयोग जारी रहेगा।
वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि
“ओलचिकी लिपि संताल समाज की संस्कृति और पहचान का परिचायक है।”
बड़ी संख्या में संताल समाज के लोग रहे उपस्थित
समारोह में मुख्य रूप से—
लक्ष्मण किस्कू (अध्यक्ष, ऑल इंडिया रायटर्स एसोसिएशन)
सी.आर. मांझी (अध्यक्ष, जाहेर थान समिति)
स्थानीय जनप्रतिनिधि
तथा संताल समाज के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, भाषा और परंपरा की झलक साफ देखने को मिली।



