Chkrdharpur/Sundargarh : झारखंड-ओडिशा सीमा पर माओवादियों ने एक बार फिर रेल नेटवर्क को निशाना बनाया है। शनिवार देर रात सारंडा वन क्षेत्र में आईईडी ब्लास्ट कर रेलवे ट्रैक को उड़ा दिया गया। इसके बाद रविवार सुबह हुई एक अन्य बारूदी सुरंग विस्फोट में भारतीय रेलवे के की-मैन ईटुवा ओराम की मौत हो गई, जबकि एक अन्य कर्मी बुधराम मुंडा गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के बिमलगढ़ थाना क्षेत्र में टोपाडीह के पास रेंजड़ा में हुई, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है और रेल यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है।
रात में उड़ाया ट्रैक, सुबह हुआ विस्फोट
शनिवार देर रात झारखंड के करमपाड़ा और ओडिशा के रेंजड़ा स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक को आईईडी विस्फोट से उड़ा दिया गया। यह क्षेत्र सरंडा जंगल में स्थित है, जो माओवादियों की गतिविधियों के लिए जाना जाता है। ट्रैक उड़ाने के बाद जब रेलवे कर्मी मरम्मत कार्य के लिए पहुंचे, उसी दौरान सुबह करीब 10 बजे एक और बारूदी सुरंग में विस्फोट हो गया।
37 वर्षीय ईटुवा ओराम की घटनास्थल पर मौत
मृतक की पहचान बिसरा निवासी 37 वर्षीय ईटुवा ओराम के रूप में हुई है। वह भारतीय रेलवे में की-मैन के रूप में कार्यरत थे। उनके साथी बुधराम मुंडा गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। ईटुवा ओराम का शव आरजीएच अस्पताल के शवगृह में रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक, परिवार को 10 लाख सहायता राशि
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतक रेलकर्मी के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री राहत कोष से परिजनों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
सर्च ऑपरेशन और बम निरोधक दस्ता तैनात
घटना के बाद रेलवे ट्रैक पर आवाजाही तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। दूसरी ओर, झारखंड पुलिस, ओडिशा पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जैगुआर्स की संयुक्त टीमों ने सरंडा वन क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन और कॉम्बिंग अभियान शुरू कर दिया है। बम निरोधक दस्ते भी मौके पर पहुंच चुके हैं और अन्य संभावित विस्फोटकों की जांच की जा रही है।
माना जा रहा है कि ओडिशा-झारखंड सीमा पर यह आईईडी ब्लास्ट न सिर्फ एक बड़ी सुरक्षा चूक को दर्शाता है, बल्कि रेलवे की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। माओवादियों द्वारा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को बार-बार निशाना बनाना राष्ट्रीय संपत्ति के खिलाफ युद्ध जैसा कृत्य है। यह घटना सुरक्षा एजेंसियों और रेलवे प्रशासन दोनों के लिए चिंतन का विषय है।



