
नगर विकास विभाग पर तथ्य छुपाने का आरोप, सरकार का जवाब बताया असंतोषजनक
सरकार ने माना: मानगो के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा पानी
एनएचएआई का एलिवेटेड कॉरिडोर कार्य अब भी अधूरा
24 जून 2025 को ही मिल चुकी थी एनओसी
आरसीसी पम्प हाउस को अब तक नहीं मिली स्वीकृति
मानगो जलापूर्ति पर विधानसभा में गरमाई बहस
जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मंगलवार को विधानसभा में मानगो पेयजल आपूर्ति परियोजना की बदहाल स्थिति को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने नगर विकास विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग न सिर्फ तथ्यों को छुपा रहा है, बल्कि सदन को गलत जानकारी भी दे रहा है।
राय ने सरकार के जवाब को पूरी तरह असंतोषजनक बताते हुए कहा कि जमीनी हकीकत और सरकारी दावों में बड़ा अंतर है।
एलिवेटेड कॉरिडोर बना बड़ी बाधा
सरयू राय ने बताया कि बालीगुमा जलमीनार से नियमित जलापूर्ति शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा एनएचएआई के एलिवेटेड कॉरिडोर का अधूरा काम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को ही इस कार्य के लिए एनओसी मिल चुकी थी
योजना के तहत ऊपर कॉरिडोर और नीचे पाइपलाइन का निर्माण होना था
इसके बावजूद कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका
राय ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर सरकार सदन में गलत जानकारी दे रही है।
वर्षों की उपेक्षा से बिगड़ी स्थिति
विधायक ने कहा कि 2019 से 2024 के बीच यह परियोजना पूरी तरह उपेक्षित रही। इस दौरान:
इंटेक वेल का आधुनिकीकरण नहीं हुआ
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पुराने पम्प नहीं बदले गए
जलमीनारों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया गया
उन्होंने यह भी बताया कि विधायक बनने के बाद उन्होंने खुद पहल करते हुए:
375 एचपी क्षमता का पम्प इंटेक वेल के लिए
150 एचपी पम्प वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए
जोन 1, 2, 3 और 5 के लिए सेन्ट्रीफ्यूगल पम्पसेट उपलब्ध कराए
इसके बावजूद आरसीसी पम्प हाउस निर्माण को अब तक सरकारी स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
सरकार ने स्वीकारा—अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा पानी
बहस के दौरान सरकार ने यह स्वीकार किया कि मानगो क्षेत्र के अंतिम हिस्सों तक अब भी नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है।
हालांकि, सरकार ने केवल इतना कहा कि कार्य “प्रक्रियाधीन” है, जिसे राय ने अपर्याप्त और टालमटोल वाला जवाब बताया।
अनियमित जलापूर्ति से जनता परेशान
सरयू राय ने यह भी मुद्दा उठाया कि मानगो में पानी की सप्लाई का कोई तय समय नहीं है।
कभी रात 1 बजे
तो कभी 2 बजे पानी छोड़ा जाता है
इस अनियमितता के कारण आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जलापूर्ति का निश्चित समय तय किया जाए।
विभागीय बदलाव के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति
राय ने बताया कि उन्होंने पहले ही सुझाव दिया था कि इस परियोजना का संचालन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बजाय नगर विकास विभाग को सौंपा जाए, ताकि बेहतर प्रबंधन हो सके।
लेकिन, उनके अनुसार:
विभाग बदलने के बाद भी हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए हैं।





