श्री श्री शीतला माता मंदिर, टुईलाडूंगरी में छत्तीसगढ़ी समाज की महिलाओं ने भाद्रपद माह की षष्ठी तिथि पर कमरछठ (हलषष्ठी) का सामूहिक व्रत और पूजन श्रद्धा व भक्ति के साथ सम्पन्न किया। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान बलराम की जयंती और संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है।
पूजा की विधि व परंपरा
महिलाओं ने मंदिर परिसर में जमीन पर गड्ढा खोदकर या अस्थायी सागरी बनाकर परंपरागत विधि से पूजा आरंभ की। गौरी-गणेश और भगवान बलराम की पूजा के साथ ब्राह्मणों द्वारा कथा वाचन हुआ।

सैकड़ों महिलाओं ने लिया भाग
इस सामूहिक पूजा में समाज की सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। व्रतधारियों में प्रमुख रूप से निषाद, हेमा साहू, सोनी साहू, चांदनी साहू, लक्ष्मी साहू, शारदा यादव, पुष्पा साहू, राजेश्वरी देवी, संध्या देवी, हेमपुष्पा निषाद, रोहिणी देवी, प्रिया देवी, रिंकी साहू, सोनी देवी, सीमा कुमारी, बेनी देवी, लक्ष्मी देवी, चित्रा देवी, निर्मला साहू, अनुपा साहू, कुंती, पार्वती देवी, कमला निषाद, मनोरमा साहू, बबली निषाद, फुलेश्वरी निषाद, नंदनी साहू, चंदा साहू समेत अनेक श्रद्धालु महिलाएं शामिल रहीं।
दिनेश, त्रिवेणी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने जानकारी दी कि पूरे जमशेदपुर में जहां-जहां छत्तीसगढ़ी समाज निवास करता है, वहां इस प्रकार की पूजा विधिपूर्वक होती है। महिलाएं संतान के कल्याण हेतु सामूहिक श्रद्धा से कमरछठ व्रत करती हैं।पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में कोषाध्यक्ष त्रिवेणी कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूजा के दौरान हलषष्ठी की छह पौराणिक कथाएं सुनाकर महिलाओं को उनके धार्मिक महत्व से अवगत कराया।



