
वीर कुंवर सिंह भवन में होली मिलन समारोह का भव्य आयोजन
जमशेदपुर : झारखंड क्षत्रिय महिला संघ की ओर से वीर कुंवर सिंह भवन, विद्यापति नगर, बारीडीह में होली मिलन समारोह ‘फाल्गुनिका’ का भव्य आयोजन किया गया। रंग, उल्लास और सांस्कृतिक विविधता से सजे इस कार्यक्रम में शहर की सैकड़ों महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन ने सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर साकार किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संघ की अध्यक्ष डॉ. कविता परमार, संरक्षिका आशा सिंह, प्रतिमा सिंह, सत्या सिंह, पूनम सिंह, चिंता सिंह, नीतू सिंह, नीलू सिंह तथा महासचिव मंजू सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। दीप प्रज्वलन के इस गरिमामय क्षण ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।

होली का संदेश : प्रेम, भाईचारा और सामाजिक समरसता
स्वागत संबोधन में अध्यक्ष डॉ. कविता परमार ने होली को प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में पारस्परिक सम्मान और सहयोग की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से आपसी सद्भाव बनाए रखने और सामाजिक सहभागिता को बढ़ाने का आह्वान किया।
रंगारंग प्रस्तुतियों ने बांधा समां
‘फाल्गुनिका’ के मंच पर गीत-संगीत, नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मनोहारी झलक देखने को मिली। रंजना मिश्रा और दुर्गावती मिश्रा की प्रस्तुति ने विशेष आकर्षण पैदा किया। उनकी सजीव और ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुति पर महिलाएं घंटों झूमती रहीं।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी महिलाओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। पूरा परिसर रंगों और उल्लास से सराबोर नजर आया।

विभिन्न इकाइयों की सक्रिय भागीदारी
समारोह में झारखंड क्षत्रिय महिला संघ की सिदगोड़ा इकाई के साथ-साथ सीतारामडेरा, टेल्को, गोविंदपुर, साकची, कदमा, सोनारी, बागबेड़ा, आदित्यपुर, जुगसलाई और सुंदरनगर इकाई की क्षत्राणियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। इसके अलावा शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी अग्रणी एवं प्रबुद्ध महिलाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
पारंपरिक व्यंजनों के साथ सौहार्दपूर्ण समापन
कार्यक्रम का समापन सामूहिक होली मिलन और पारंपरिक व्यंजनों के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। धन्यवाद ज्ञापन महासचिव मंजू सिंह ने किया और सभी उपस्थित महिलाओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार की सहभागिता बनाए रखने की अपील की।
‘फाल्गुनिका’ केवल एक होली मिलन समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा।






