बाल मेला जैसे आयोजन में आना सुखद अनुभव—राज्यपाल

जमशेदपुर : चतुर्थ बाल मेला 2025 के मुख्य समारोह में शामिल हुए झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने आज के बच्चों की बदलती जीवनशैली पर चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में बच्चे मोबाइल की दुनिया में कैद होकर वास्तविक समाज से दूर होते जा रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चों को फिर से समाज—समुदाय से कैसे जोड़ा जाए।


समाज से दूर होते बच्चों को जोड़ना बड़ी चुनौती—राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि बाल मेला केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों की मासूमियत, अधिकारों, पोषण और भविष्य की दिशा से जुड़ी एक बड़ी पहल है। उन्होंने कहा—
झारखंड में कुपोषण अभी भी गंभीर समस्या है
इसे दूर करने के प्रयासों में और गति लानी होगी
बच्चों के विकास के पाँच आधार—स्नेह, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा और अवसर—मजबूत करने की आवश्यकता है
उन्होंने झारखंड के जनजातीय समाज का उदाहरण देते हुए कहा—
“यहां मान्यता है कि बच्चा केवल परिवार का नहीं, पूरे समुदाय का होता है। यह सामुदायिक जिम्मेदारी का प्रेरक संदेश है।”
राज्यपाल ने बाल मेले को सामाजिक एकता का मंच बताते हुए कहा कि इसमें माता-पिता, शिक्षक, डॉक्टर, जन-प्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाएँ और मीडिया सबकी भूमिका अहम है।

बच्चों को सपने देखने की आज़ादी दें, बेहतर माहौल दें—राज्यपाल की अपील
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों में अद्भुत प्रतिभा है और वे प्रकृति से बेहद प्रेम करते हैं।
उन्होंने माता-पिता को संदेश देते हुए कहा—
बच्चों को सपने देखने की पूरी छूट दें
उनके साथ संवाद करें
बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान दें
एक बेटी शिक्षित होगी तो समाज मजबूत होगा
उन्होंने कहा कि 2022 में विधायक सरयू राय की प्रेरणा से शुरू हुआ बाल मेला आज जन-जागरण का सशक्त मंच बन गया है।
इस वर्ष विश्व बाल दिवस की थीम “प्यार से पालन-पोषण—विश्व का नेतृत्व” बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रेमपूर्ण वातावरण की आवश्यकता पर जोर देती है।


स्मारिका का विमोचन, कलाकारों का सम्मान
राज्यपाल ने 40 पन्नों की बहुरंगी स्मारिका का विमोचन किया, जिसका संपादन आनंद सिंह ने किया है।
संपादक मंडल में
डॉ. त्रिपुरा झा
चंद्रदीप पांडेय
अनीता शर्मा
शामिल हैं।
राज्यपाल को
उनका पोट्रैट दीपांकर कर्मकार ने भेंट किया
बाल मेला से संबंधित चित्र विप्लव दा द्वारा तैयार किया गया

बच्चे मेधावी बनें और देश को आगे बढ़ाएं—विधायक सरयू राय
जल्द जारी होगा जमशेदपुर घोषणापत्र
अपने संबोधन में जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने कहा—
बाल मेला की शुरुआत 2022 में बच्चों के मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए की गई
लॉकडाउन (2020–21) के दौरान बच्चों पर प्रतिकूल असर को देखते हुए बाल दिवस (14 नवंबर) पर यह आयोजन शुरू किया गया
विश्व बाल दिवस (20 नवंबर) को इसका समापन होता है
उन्होंने बताया कि—
इस बार 4200 बच्चों ने 18 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया
सरकारी व निजी विद्यालयों ने प्रशिक्षकों के साथ बच्चों को भेजा
स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों को भी मेले से जोड़ा गया है
अगला बाल मेला बड़े स्थल पर आयोजित होगा, ताकि पूरे झारखंड की सहभागिता सुनिश्चित हो सके
सरयू राय ने बताया कि शहर को बाल मित्र जिला बनाने की दिशा में कार्य जारी है और इसके लिए जमशेदपुर घोषणापत्र जल्द जारी किया जाएगा।

राज्यपाल का भव्य स्वागत, सैकड़ों लोग रहे उपस्थित
राज्यपाल जब बोधि मैदान पहुंचे, तो पीएमश्री कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पटमदा की छात्राओं ने बैंड बजाकर स्वागत किया।
इसके बाद—
दीप प्रज्ज्वलन
राष्ट्रगान
स्मृति चिह्न प्रदान
का क्रम चला।

सुरक्षा में लगे रहे एस पी कुमार शिवाशीष एंड टीम
जिला पुलिस की तरफ से सिटी एस पी कुमार शिवाशीष अपने पुलिस पदाधिकारियों के साथ उपस्थित रहे।
स्वागत सम्मान करने वालों में—
आशुतोष राय, अंशुल शरण, राघवेंद्र प्रताप सिंह, सुशील खड़के, तारक मुखर्जी, सुधीर सिंह, सुनील सिंह, उषा यादव, कुंवर अतुल सिंह, ममता सिंह, प्रकाश कोया और रीना शामिल रहे।
स्वागत भाषण गोविंद दोदराजका ने दिया और कहा कि सरयू राय इस राज्य के सबसे बौद्धिक विधायकों में से एक हैं।
मेला संयोजक मनोज कुमार सिंह ने संचालन किया।
कार्यक्रम में रवींद्र सिंह, नीरज सिंह, अमरप्रीत सिंह काले, सुधांशु ओझा, दिलीप गोयल, रिटायर्ड आईपीएस संजय रंजन सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।





