पूर्णिमा साहू ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखा पत्र
कहा, 2005 और 2018 में हुई पहलें अब भी अधूरी
चुनावी सभाओं के वादों की याद दिलाई गई
झामुमो-कांग्रेस गठबंधन से जनहित में त्वरित फैसला लेने की अपील
जमशेदपुर : जमशेदपुर की 86 से अधिक बस्तियों में वर्षों से रह रहे लाखों वासियों को भूमि पर मालिकाना हक दिलाने की मांग एक बार फिर से जोर पकड़ने लगी है। इसी कड़ी में जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने सोमवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।
“बस्तियों को अधिकार दें, वादों को निभाएं” – पूर्णिमा साहू
अपने पत्र में विधायक ने कहा कि बस्तीवासियों की यह पुरानी और जायज मांग रही है कि उन्हें उनकी आवासीय भूमि पर पूर्ण मालिकाना हक मिले। इससे उनका जीवन सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थिर बन सकेगा।
विधायक ने इस विषय में सरकार को उनकी ही नीतियों और वादों की याद दिलाते हुए बताया कि:
2005 में टाटा लीज नवीकरण के समय राज्य सरकार ने करीब 1800 एकड़ भूमि 86 बस्तियों के लिए आरक्षित की थी।
2018 में तत्कालीन एनडीए सरकार ने 10-10 डिसमिल भूमि पर लीज बंदोबस्ती की नीति बनाई थी।
2024 विधानसभा चुनाव में झामुमो और कांग्रेस ने घोषणापत्र में बस्तीवासियों को मालिकाना हक देने का वादा किया था।
चुनावी सभाओं में भी हुआ था वादा
पूर्णिमा साहू ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि नवंबर 2024 में जमशेदपुर की एक चुनावी सभा में विधायक कल्पना सोरेन ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि झामुमो की सरकार बनने पर बिरसानगर सहित सभी बस्तियों को मालिकाना हक दिया जाएगा।
विधायक ने उन सभी बयानों की समाचार-पत्र कटिंग भी संलग्न करते हुए सीएम से आग्रह किया कि अब जब गठबंधन सरकार सत्ता में है, वक्त है वादा निभाने का।

विधानसभा में भी उठाया मुद्दा
विधायक साहू ने बताया कि इस मुद्दे को उन्होंने झारखंड विधानसभा के बजट सत्र 2025 में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से भी उठाया था, लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
मालिकाना हक से बदलेगा जीवन” — विधायक पूर्णिमा साहू
उन्होंने कहा कि यदि बस्तीवासियों को मालिकाना हक दिया जाता है, तो उनके:
सामाजिक स्तर में सुधार होगा
शैक्षणिक अवसर बढ़ेंगे
आर्थिक स्थिति मजबूत होगी
और सबसे महत्वपूर्ण, उन्हें सम्मानजनक जीवन मिलेगा



