
10 से 25 फरवरी 2026 तक जिले के 6 प्रखंडों में चलेगा विशेष अभियान, 9 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में फाइलेरिया उन्मूलन पखवाड़ा का विधिवत शुभारंभ मंगलवार को किया गया। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, सुंदर नगर (जुगसलाई) में बच्चों को एलबेंडाजोल एवं डीईसी की दवा खिलाकर अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उपायुक्त ने स्वयं भी बच्चों के साथ दवा का सेवन कर लोगों को जागरूकता का संदेश दिया।
यह विशेष अभियान 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक जिले के पोटका, पटमदा, जुगसलाई, मुसाबनी, घाटशिला और बोड़ाम प्रखंडों में संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत लगभग 9 लाख लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पहले दिन बूथों पर, फिर घर-घर जाकर दी जाएगी दवा
अभियान के पहले दिन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में विशेष बूथ बनाकर स्वास्थ्यकर्मियों एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा दवा खिलाई गई। अभियान के शेष दिनों में डोर-टू-डोर अभियान के माध्यम से लक्षित आबादी को घर-घर जाकर एलबेंडाजोल एवं डीईसी की दवा खिलाई जाएगी।

उपायुक्त की अपील: अफवाहों से बचें, दवा का सेवन जरूर करें
इस अवसर पर उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने फाइलेरिया के कारण, लक्षण और बचाव की विस्तृत जानकारी देते हुए जिलेवासियों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य कर्मियों के सामने दवा का सेवन अवश्य करें।
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष में एक बार सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जाता है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक झारखंड को फाइलेरिया मुक्त बनाना है, जिसे जनसहयोग से ही संभव किया जा सकता है।
कौन नहीं करेगा दवा का सेवन, क्या रखें सावधानी
इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने बताया कि
2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे,
गर्भवती महिलाएं,
और अत्यधिक बीमार व्यक्ति दवा का सेवन नहीं करेंगे।
उन्होंने बताया कि दवा खाली पेट नहीं खानी है। कुछ लोगों में हल्के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और निःशुल्क हैं।
फाइलेरिया क्या है और कैसे फैलता है
डॉ. साहिर पाल ने बताया कि फाइलेरिया को आमतौर पर हाथी पांव कहा जाता है। यह बीमारी मच्छर के काटने से फैलती है। इससे हाथ, पैर, स्तन और हाइड्रोसील में असामान्य सूजन हो सकती है। संक्रमण प्रायः बचपन में होता है, लेकिन इसके लक्षण 5 से 15 साल बाद दिखाई देते हैं।
उन्होंने बताया कि हाइड्रोसील का इलाज संभव है, जबकि अन्य अंगों की सूजन का इलाज लंबा चल सकता है। फाइलेरिया पीड़ितों के प्रति करुणा और सहयोग जरूरी है, भेदभाव नहीं।
बचाव के उपाय
फाइलेरिया से बचाव के लिए लोगों से अपील की गई कि वे
मच्छरदानी का उपयोग करें,
साफ-सफाई रखें,
और स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही दवा का सेवन अवश्य करें।
किसी भी परेशानी की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई।





