वैश्विक विशेषज्ञों ने साझा किए विचार: क्रिटिकल मिनरल्स के पुनर्चक्रण, नीति निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला पर गहन चर्चा

जमशेदपुर : खनन मंत्रालय के राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के तहत स्थापित उत्कृष्टता केंद्र – सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “क्रिटिकल मेटल्स” (CRITMET 2025) का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ।
इस सम्मेलन का उद्देश्य क्रिटिकल मेटल्स के क्षेत्र में भारत और विश्वभर के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करना था, जहां उन्होंने खनन, संवर्धन (Beneficiation), पुनर्चक्रण (Recycling) और अंतरराष्ट्रीय नीति एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (Supply Chain Management) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।


अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने रखे अभिनव विचार, बैटरी रीसाइक्लिंग पर खास सत्र
सम्मेलन के तीसरे और अंतिम दिन फ्रांस के Université de Lorraine, GeoResources से प्रोफेसर अलेक्ज़ांद्र शेन (Prof. Alexandre Chene) ने मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किया।
उन्होंने बैटरी रीसाइक्लिंग की उन्नत विधियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी और बताया कि यह प्रक्रिया भविष्य में क्रिटिकल मिनरल्स के स्थायी स्रोत के रूप में उभर सकती है।
इसके बाद फ्रांस के IGP-CNRS से प्रोफेसर एरिक डी. वैन हुलबुश (Prof. Eric D. Van Hullebusch) ने अपने प्लेनरी व्याख्यान में बताया कि प्रकृति से प्रेरित तकनीकों के माध्यम से हम ई-वेस्ट (Electronic Waste) जैसे द्वितीयक स्रोतों से भी क्रिटिकल मेटल्स प्राप्त कर सकते हैं।
द्वितीयक स्रोतों के पुनर्चक्रण पर केंद्रित रहा तीसरा दिन
तकनीकी सत्रों में द्वितीयक स्रोतों से क्रिटिकल मिनरल्स के पुनर्चक्रण पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि ये स्रोत न केवल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाते हैं, बल्कि कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकने में भी सहायक हैं।
सम्मेलन के दौरान देश-विदेश के विभिन्न शोध संस्थानों के शोधार्थियों ने मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियाँ दीं। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार भी प्रदान किए गए —
मौखिक प्रस्तुति श्रेणी में दो प्रथम पुरस्कार,
पोस्टर श्रेणी में एक प्रथम पुरस्कार,
दोनों श्रेणियों में दो-दो द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए गए।
इसके अतिरिक्त, छात्रों को 15 ट्रैवल ग्रांट और वरिष्ठ शोधकर्ताओं को 5 ट्रैवल ग्रांट प्रदान किए गए ताकि वे भविष्य में भी शोध कार्यों में सक्रिय रह सकें।
क्रिटिकल मेटल्स रिसर्च को नई दिशा देगा CRITMET 2025
समापन सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि CRITMET 2025 ने भारत में क्रिटिकल मेटल्स अनुसंधान को नई दिशा दी है।
यह सम्मेलन न केवल वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञों को जोड़ने का माध्यम बना, बल्कि नीति निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों को भी एक मंच पर लेकर आया।
इससे भविष्य में भारत की भूमिका क्रिटिकल मिनरल्स के वैश्विक व्यापार और तकनीकी विकास में और मजबूत होगी।



