टाटा मोटर्स के महामंत्री आरके सिंह के समर्थन में आए प्रवीण सिंह के प्रेस कॉन्फ्रेंस का दिया जवाब
जमशेदपुर : युवा मजदूर नेता बंटी सिंह ने सोशल मीडिया पर फिर से टाटा मोटर्स यूनियन के महामंत्री आर के सिंह के खिलाफ फिर से आरोपों की झड़ी लगाई। उन्होंने पिछले दिनों टाटा मोटर्स यूनियन के समर्थन में आए प्रवीण सिंह के प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए बातों का जवाब दिया।
प्रवीण सिंह को दी सलाह
बंटी सिंह ने यूनियन के सलाहकार प्रवीण सिंह को सलाह देते हुए कहा कि उम्र के इस दौर में उन्हें सही का साथ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चंद्रभान सिंह को हटाने प्रकाश और उसकी टीम का साथ दिए फिर प्रकाश को हटाने में आर के सिंह का।
3 की जगह 4 साल का ग्रेड
बंटी सिंह ने कहा कि आर के सिंह की उपलब्धि यह रही कि जो ग्रेड टाटा मोटर्स में तीन साल का होता था उसे तीन साल से बढ़ाकर चार साल का करवा दिया। उन्होंने कहा कि इसे यूनियन की उपलब्धि कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रेड में जो पैसा एक बार में मिलता था उसे किस्तों में करवा दिया।
सोशल सिक्युरिटी की भी बताई हकीकत
बंटी सिंह ने कहा कि जिस सोशल सिक्युरिटी की बात प्रवीण सिंह यूनियन की उपलब्धि बता रहे है उसमें मजदूरों का पैसा काटकर मजदूरों को दिया जा रहा है। इसमें अतिरिक्त कोई राशि प्रबंधन से नहीं दिलवाई जा रही है। उन्होंने कहा है कि कोविड के समय प्रीमियम लगभग दोगुना कर दिया गया पर उस अनुपात में बीमा राशि नहीं बढ़ाई गई। उन्होंने लीव बैंक के विषय में कहा कि इसमें मजदूरों को ही नुकसान हुआ क्योंकि इसमें सी एल और पी एल से एडजस्ट किया गया।
जियो ग्रेड को हुआ नुकसान
उन्होंने कहा कि नए जीओ ग्रेड से कर्मचारी का काफी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि इसमें मजदूरों का 13000 को हटाकर 300 पर ला दिया गया। उन्होंने कहा कि अपना घर प्रोजेक्ट के नाम पर लोगों से हस्ताक्षर करवाया गया पर उस हस्ताक्षर का कही और उपयोग किया गया।
प्रबंधन के पदाधिकारी को भी दी चेतावनी
उन्हेंने कहा कि अगर अब इसमें किसी कर्मचारी की नौकरी लेने का प्रयास किया गया तो जिनके हस्ताक्षर से ऐसा होगा उस पदाधिकारी के घर का घेराव हजारों मजदूर के साथ करेंगे।
विपक्ष और असंतुष्टों को मिला आवाज
बंटी सिंह के द्वारा आर के सिंह के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान में आर के विरोधी खेमे ही नहीं कंपनी में वैसे मजदूरों को भी आवाज मिल गई है जो प्रबंधन के डर से साथ होने का दिखावा करते हैं। कई लोग पर्दे के पीछे रहकर बंटी को सपोर्ट कर रहे है। कर्मचारियों और नेतागिरी का शौक रखने वालों ने कहा कि चंद्रभान सिंह के दौर में विरोध करने वाले को भी नौकरी नहीं गंवानी पड़ी पर आरके सिंह के कार्यकाल में विरोध करने वालों की नौकरी चली गई।



