
प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और जनजातीय संस्कृति का प्रतीक है सरहुल

जमशेदपुर : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित अपने आवास पर पारंपरिक विधि-विधान के साथ सरहुल पूजा की। इस अवसर पर उन्होंने प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करते हुए राज्यवासियों के सुख, समृद्धि और विकास की कामना की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह झारखंड की जनजातीय परंपराओं, सामुदायिक एकता और प्रकृति के सम्मान का जीवंत प्रतीक है। यह त्योहार हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश
सरहुल पूजा के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पर्व आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का अवसर है। यह त्योहार लोगों को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझने की सीख देता है।
उन्होंने कहा कि सरहुल का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सामूहिक सद्भाव, भाईचारे और एकजुटता को भी मजबूत करता है।

झारखंडवासियों के विकास और समृद्धि की कामना
पूजा-अर्चना के दौरान अर्जुन मुंडा ने झारखंडवासियों के उज्ज्वल भविष्य, राज्य के सर्वांगीण विकास और सभी समुदायों के बीच शांति व सद्भाव बनाए रखने की कामना की।
उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के साथ गहरे संबंध से है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।






