वर्षों से चली आ रही महाप्रसाद की परंपरा
25000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद
वीआईपी से लेकर आम जनता होते है शामिल
जमशेदपुर : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय आदिवासी कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला महाप्रसाद कार्यक्रम इस बार कल 22 अक्टूबर को संपन्न होगा। यह आयोजन झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

जनसामान्य से लेकर वीआईपी तक होते हैं शामिल
इस महाप्रसाद कार्यक्रम में हर वर्ष न केवल आम जनता, बल्कि विधायक, सांसद, कॉर्पोरेट हस्तियां, सामाजिक कार्यकर्ता तथा अन्य प्रमुख लोग शामिल होते हैं। यह आयोजन जन संवाद और सामाजिक समरसता का उदाहरण बन चुका है।
इस बार कार्यक्रम में और भी राजनीतिक दिग्गजों की भागीदारी की संभावना है, क्योंकि यह आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब घाटशिला उपचुनाव की सरगर्मी भी तेज है। ऐसे में महाप्रसाद का मंच राजनीतिक दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व रखता है।


मीरा मुंडा निभाती हैं अहम भूमिका
इस महाप्रसाद आयोजन में अर्जुन मुंडा की धर्मपत्नी और पूर्व पोटका विधानसभा प्रत्याशी मीरा मुंडा भी बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं। वे खासतौर पर महिलाओं की भागीदारी और उनकी सुविधा का विशेष ख्याल रखती हैं, जिससे यह कार्यक्रम परिवार और समाज की एकता का सशक्त उदाहरण बनता है।
क्यों है यह आयोजन खास?
अर्जुन मुंडा द्वारा यह आयोजन वर्षों से एक धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक समागम के रूप में किया जा रहा है।
यह आयोजन उनके जनसंपर्क और जनसरोकार की भावना को दर्शाता है।
घाटशिला उपचुनाव के मद्देनजर इस बार राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र भी बन सकता है।
महाप्रसाद के आयोजन में इनकी प्रमुख भूमिका
महाप्रसाद के आयोजन में मुख्य रूप से भाजपा नेता बिनोद सिंह, रूपेश कतरीयार, राजन सिंह, अनिल सिंह, अमिताभ सिंह बॉबी, दिनेश साहू, सुधांशु ओझा, रामनाथ सिंह, मंटू सिंह, गणेश सोलंकी, काली शर्मा, अमित संघी, संजय सिंह, गणेश विश्वकर्मा, राजपति देवी, नीलू सिंह, शिखा राय चौधरी, गणेश मुंडा, काजू सांडिल समेत अन्य काफी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।



