
इलाज के दौरान टाटा मेन हॉस्पिटल में तोड़ा दम, समझौते के बाद परिजनों ने लिया शव
जमशेदपुर : सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर थाना क्षेत्र स्थित चलियामा में अवस्थित रुंगटा स्टील प्लांट में कार्य के दौरान गंभीर रूप से झुलसे ठेका मजदूर रतन घोष की शनिवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही परिजनों, सहकर्मियों और स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। घटना के बाद मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन, ठेका एजेंसी और परिजनों के बीच वार्ता हुई, जिसके बाद 15 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति बनी।
31 मई को हादसे में गंभीर रूप से झुलसे थे रतन घोष
जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर के परसुडीह निवासी करीब 48 वर्षीय रतन घोष 31 मई को रुंगटा स्टील प्लांट में कार्यरत थे। इसी दौरान वे गर्म तरल पदार्थ की चपेट में आ गए, जिससे उनका शरीर गंभीर रूप से झुलस गया। हादसे के तुरंत बाद कंपनी प्रबंधन ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए जमशेदपुर स्थित टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में भर्ती कराया था।
कई दिनों तक चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चलता रहा, लेकिन गंभीर चोटों के कारण शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
ठेका एजेंसी के माध्यम से कर रहे थे काम
बताया गया कि रतन घोष रुंगटा स्टील प्लांट में ठेका एजेंसी श्रीशिवा कंस्ट्रक्शन एंड प्रोजेक्ट के तहत कार्यरत थे। उनकी मौत की सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर में परिजन, मजदूर प्रतिनिधि और स्थानीय जनप्रतिनिधि पहुंच गए। इस दौरान मजदूरों और परिजनों के बीच घटना को लेकर गहरी नाराजगी और दुख का माहौल देखने को मिला।
मुआवजे को लेकर हुई लंबी वार्ता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ठेका एजेंसी के संवेदक रांची से तत्काल जमशेदपुर पहुंचे। टाटा मेन हॉस्पिटल में स्थानीय जनप्रतिनिधि माणिक मल्लिक, मृतक के परिजन, मजदूर प्रतिनिधि और कंपनी प्रबंधन के बीच विस्तृत बातचीत हुई।
काफी देर तक चली वार्ता के बाद सभी पक्षों के बीच सहमति बनी। चर्चा के दौरान कंपनी और ठेका एजेंसी ने मृतक के परिवार को तत्काल 15 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति जताई।
अंतिम संस्कार का खर्च भी उठाएंगे प्रबंधन
बैठक में यह भी तय हुआ कि अंतिम संस्कार और अन्य धार्मिक क्रियाकर्म से संबंधित आवश्यक खर्च भी कंपनी और ठेका एजेंसी द्वारा वहन किया जाएगा। इसके अलावा मृतक के आश्रित परिवार के एक सदस्य को आवश्यकता पड़ने पर रोजगार उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक विचार करने की सहमति बनी।
समझौते के बाद पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुए परिजन
मुआवजे और अन्य मांगों पर सहमति बनने के बाद परिजनों ने शव के पोस्टमार्टम की अनुमति दी। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसे अंतिम संस्कार के लिए उनके निवास स्थान ले जाया गया।
सुरक्षा मानकों को लेकर फिर उठे सवाल
स्थानीय जनप्रतिनिधि माणिक मल्लिक ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु किसी भी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति होती है। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को और अधिक सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।






