
रेलवे अफसरों की हठधर्मिता चिंताजनक: सरयू राय

जमशेदपुर : भीषण गर्मी के बीच टाटानगर रेलवे स्टेशन परिसर रविवार को यात्री ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी के खिलाफ आवाज बुलंद करने का केंद्र बन गया। रेल यात्री संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने खुद हस्ताक्षर कर की। इसके बाद बड़ी संख्या में रेल यात्रियों ने वाइटबोर्ड पर हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज कराया।
तपती धूप के बावजूद यात्रियों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। कई लोगों ने मौके पर ही अपने अनुभव साझा किए और इस अभियान का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया।

सुबह से ही जुटने लगे यात्री, दो स्थानों पर भरे गए फॉर्म
सुबह 10 बजे से शुरू हुए इस अभियान को लेकर 9:30 बजे से ही स्टेशन परिसर में हलचल दिखने लगी थी। प्लेटफॉर्म से बाहर निकलने वाले अधिकांश यात्रियों ने स्वेच्छा से हस्ताक्षर किए।
फीडबैक लेने के लिए दो प्रमुख स्थान बनाए गए थे—
प्लेटफॉर्म नंबर 1 जाने वाले मार्ग के सामने
टिकट बुकिंग कार्यालय के पास
यहां यात्रियों से उनकी यात्रा, ट्रेन की देरी और उसके कारणों से जुड़े सवालों के फॉर्म भरवाए गए। साथ ही QR कोड के जरिए डिजिटल समर्थन की भी व्यवस्था की गई, जिसका कई यात्रियों ने उपयोग किया।

“रेलवे का रवैया नहीं बदला तो होगा उग्र आंदोलन”
इस मौके पर सरयू राय ने रेलवे अधिकारियों के रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की हठधर्मिता बेहद चिंताजनक है और यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता की कमी साफ दिखती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ट्रेनों का संचालन समय पर नहीं सुधरा तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा से भी समर्थन लेने के लिए बातचीत की जाएगी।
सरयू राय ने आरोप लगाया कि चक्रधरपुर रेल मंडल में जानबूझकर यात्री ट्रेनों को रोका जाता है और मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अधिक माल ढुलाई दिखाकर अधिकारी अपनी उपलब्धि बढ़ाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा,
“अगर यही रवैया जारी रहा तो हम रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय तक पूरी स्थिति पहुंचाएंगे। जरूरत पड़ी तो न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा।”

“मालगाड़ियों को प्राथमिकता, यात्रियों के साथ अन्याय”
सरयू राय ने कहा कि कई बार ट्रेनों को चांडिल, कांड्रा, मुसाबनी और राखा माइंस जैसे स्टेशनों पर अनावश्यक रूप से रोका जाता है, जो यात्रियों के साथ अन्याय है। उन्होंने इसे मानवाधिकार से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि इस पर कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
उन्होंने रेलवे के उस तर्क पर भी सवाल उठाया, जिसमें अधिकारी कहते हैं कि उनके पास “जादू की छड़ी” नहीं है। राय ने पलटकर पूछा कि आखिर कौन सी “जादू की छड़ी” है, जिससे मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
आगे और तेज होगा आंदोलन, रेल पटरी पर बैठने की चेतावनी
सरयू राय ने कहा कि आने वाले दिनों में आदित्यपुर, गम्हरिया और घाटशिला में भी ऐसे अभियान चलाए जाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ी तो टाटानगर से चांडिल तक रेल पटरियों पर बैठकर आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि समिति की एक ही मांग है—टाटानगर से चलने वाली सभी ट्रेनें समय पर चलें और समय पर पहुंचें।
राजधानी एक्सप्रेस की “गलत रिपोर्टिंग” पर भी उठे सवाल
सरयू राय ने उदाहरण देते हुए बताया कि राजधानी एक्सप्रेस चांडिल तक समय पर पहुंची, लेकिन टाटानगर आने में 50 मिनट की देरी हुई। वहीं, रेलवे के ऐप में ट्रेन के पहले ही पहुंचने की गलत जानकारी दिखाई गई, जिसे उन्होंने गंभीर लापरवाही बताया।
एआरएम के रवैये पर नाराजगी, संघर्ष और तेज करने के संकेत
रेल यात्री संघर्ष समिति के संयोजक शिवशंकर सिंह ने बताया कि कार्यक्रम की सूचना देने के दौरान एआरएम का रवैया नकारात्मक रहा। उन्होंने कहा कि अब जरूरत पड़ी तो एआरएम के खिलाफ भी मोर्चा खोला जाएगा।
उन्होंने कहा,
“यह आंदोलन लंबा चलेगा। यह सिर्फ शुरुआत है, पूरी लड़ाई अभी बाकी है।”
सैकड़ों लोगों की भागीदारी, वाइटबोर्ड हस्ताक्षरों से भरे
अभियान के दौरान लगाए गए दोनों वाइटबोर्ड हस्ताक्षरों से भर गए। बड़ी संख्या में यात्रियों ने न सिर्फ हस्ताक्षर किए, बल्कि रेलवे के प्रति अपनी नाराजगी भी खुलकर जाहिर की।
महिलाओं की टीम ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और यात्रियों को जोड़ने का काम किया।
भीषण गर्मी में भी डटे रहे लोग
कड़ी धूप और गर्मी के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। समिति की ओर से ओआरएस घोल और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई थी, जिससे लोग राहत पाते रहे और अभियान में शामिल रहे।

प्रमुख लोगों की उपस्थिति
इस अभियान में आशुतोष राय, अमृता मिश्रा, अमित शर्मा, नीरज सिंह, प्रकाश कोया, राजेश प्रसाद, अंजली सिंह, कौशल, निर्मल सिंह, रणजीत प्रसाद, दुर्गा राव, जीतेंद्र सिंह, विकास सहनी, मनोज सिंह, तारक मुखर्जी, शेषनाथ पाठक, दिनेश सिंह, विनोद सिंह, चुन्नू भूमिज, बबलू कुमार, प्रवीण सिंह, अर्जुन यादव, विजय सिंह, शंकर कर्मकार, शमशाद खान, सुधीर सिंह, राकेश कुमार, सोनू झा, हरि दयाल राय समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए।





