
विश्व रेडियो दिवस 2026 : अपने 60 वर्षों की साधना को दिखाया
जमशेदपुर से एक प्रेरक पहल
जमशेदपुर : विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर गाइड इंटरनेशनल रेडियो लिस्नर्स क्लब के अध्यक्ष जमशेदपुर के चिन्मय महतो ने रेडियो के साथ अपने 60 वर्षों के गहरे जुड़ाव और अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में जब पहली बार रेडियो के माध्यम से समाचार प्रसारित हुआ, तब यह पूरी दुनिया के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। उस दौर में रेडियो रखना प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक माना जाता था।
आज तकनीक ने भले ही दुनिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जोड़ दिया हो, लेकिन रेडियो की आत्मीयता और विश्वसनीयता अब भी अद्वितीय है।

रेडियो : समाज का आईना और संवाद का सशक्त माध्यम
चिन्मय महतो ने बताया कि समय के साथ रेडियो की जड़ें विश्वभर में बरगद की तरह फैलती गईं। समाचार, संगीत, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए इस माध्यम ने समाज को जोड़ा और विविध भाषाओं को एक मंच दिया।
उनके अनुसार, रेडियो ने न केवल सूचना का प्रसार किया बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व को भी मजबूती प्रदान की। दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचने की इसकी क्षमता ने इसे जन-जन का साथी बना दिया।
छह दशक का अटूट रिश्ता
चिन्मय महतो पिछले 60 वर्षों से सक्रिय रेडियो श्रोता रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने देश-विदेश के अनेक रेडियो प्रसारण केंद्रों को हजारों पोस्टकार्ड और पत्र भेजे। इन पत्रों में उन्होंने कार्यक्रमों पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं और फरमाइशी गीतों की मांग भी की। यह सिलसिला आज भी जारी है।
वे मानते हैं कि रेडियो के साथ यह रिश्ता केवल शौक नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा है।

992 रेडियो सेट के साथ ‘मिनी रेडियो म्यूजियम’
रेडियो संग्रह उनका विशेष शौक है। वर्तमान में उनके पास लगभग 992 विभिन्न प्रकार के रेडियो सेट मौजूद हैं। इन ऐतिहासिक उपकरणों को संजोकर उन्होंने एक “मिनी रेडियो म्यूजियम” तैयार किया है।
इस म्यूजियम का उद्देश्य नई पीढ़ी को रेडियो तकनीक के विकास, उसके इतिहास और बदलते स्वरूप से परिचित कराना है। वे हर वर्ष विश्व रेडियो दिवस पर छात्र-छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।
इस वर्ष की थीम: Radio and Artificial Intelligence
इस वर्ष विश्व रेडियो दिवस की थीम “Radio and Artificial Intelligence” रखी गई है। इस संदर्भ में चिन्मय महतो का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में भी रेडियो की प्रासंगिकता बनी रहेगी, बल्कि तकनीक के साथ मिलकर यह और प्रभावी बनेगा।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति रेडियो म्यूजियम के लिए रेडियो सेट दान करना चाहता है, तो वह सहयोग के लिए आगे आए।
‘आई लव रेडियो’—एक जीवन मंत्र
अपने संदेश के अंत में चिन्मय महतो ने भावुक शब्दों में कहा कि रेडियो उनके जीवन का अहम हिस्सा है और वे हमेशा “आई लव रेडियो” की भावना के साथ इस माध्यम से जुड़े रहेंगे।





