जमशेदपुर : केरला पब्लिक स्कूल (के.पी.एस.) कदमा में रविवार को “लेट्स मेक अ डिफरेंस (LMAD) यूथ कॉन्फ्रेंस 2025” का भव्य समापन हुआ।
चार दिवसीय इस सम्मेलन का अंतिम दिन आत्मबोध, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और भावनात्मक नवीकरण की भावना से ओत-प्रोत रहा।
कार्यक्रम में जमशेदपुर के 17 विद्यालयों के लगभग 750 छात्रों ने भाग लिया, जिन्होंने “मौन में मन की आवाज़ सुनने” और “सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाने” का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि डी. बी. सुन्दरारामन और विशिष्ट गणमान्यजन रहे उपस्थित
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री डी. बी. सुन्दरारामन (उपाध्यक्ष, टाटा स्टील) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में श्री वायरल मजूमदार (राष्ट्रीय निदेशक, LMAD), श्री राजीव एवं श्रीमती श्रद्धा अग्रवाल (LMAD समन्वयक), श्री शरत चन्द्रन (निदेशक, के.पी.एस. समूह), सुश्री शान्ता वैद्यनाथन (संस्थापक प्राचार्या), सुश्री लक्ष्मी आर. (शैक्षणिक निदेशक) और सुश्री आलमेलु रविशंकर (प्रधानाध्यापिका, के.पी.एस. कदमा) सहित कई गणमान्यजन मौजूद थे।
सिल्वर जुबली के साथ आत्मबोध का उत्सव
इस वर्ष का सम्मेलन विशेष इसलिए भी रहा क्योंकि इसने LMAD–KPS साझेदारी के 25 वर्ष (Silver Jubilee) का उत्सव मनाया।
LMAD की यात्रा 2000 में “सवेरा” नामक एक आवासीय शिविर से शुरू हुई थी, जो धीरे-धीरे आत्मविकास और आत्मनेतृत्व के राष्ट्रीय आंदोलन में परिवर्तित हो गया।
“क्वायट टाइम” बना आत्मसंवाद का माध्यम
LMAD के मूल में स्थित है “क्वायट टाइम” — एक ऐसा सत्र जहाँ विद्यार्थी अपने विचारों से संवाद करते हैं और अपने भीतर की आवाज़ को सुनते हैं।
इस प्रक्रिया के दौरान युवाओं ने सीखा कि डिजिटल विकर्षणों के बीच भी आत्मसंतुलन और भावनात्मक दृढ़ता कैसे विकसित की जा सकती है।


वायरल मजूमदार ने दिया आत्म-संयम का संदेश
LMAD के राष्ट्रीय निदेशक श्री वायरल मजूमदार ने अपने संबोधन में कहा —
“हर पीढ़ी अपने distractions से जूझती है। असली शक्ति दुनिया को शांत करने में नहीं, बल्कि अपने मन को साधने में है। जब बाहर का शोर भीतर की आवाज़ से ऊँचा हो जाए, तब हमें रुककर फिर से सुनना चाहिए — यहीं से असली परिवर्तन शुरू होता है।”
शरत चन्द्रन ने कहा – शिक्षा तभी सार्थक जब उसमें आत्मबोध हो
के.पी.एस. समूह के निदेशक श्री शरत चन्द्रन ने कहा —
“के.पी.एस. ट्रस्ट पिछले 25 वर्षों से इस आत्ममंथन-आधारित सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल शैक्षणिक प्रगति नहीं, बल्कि भावनात्मक परिपक्वता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास भी है।”



