सरकार खनन को संरक्षण से ज़्यादा महत्व दे रही है, 8 अक्टूबर से पहले सारंडा को घोषित करें सैंक्चुअरी: सरयू राय
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण: सरयू राय
जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक और सारंडा संरक्षण अभियान के संयोजक सरयू राय ने झारखंड सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 24 जून 2025 को वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हलफनामा दायर कर 858.18 वर्ग किमी में फैले सारंडा जंगल के 575.19 वर्ग किमी हिस्से को वन्यजीव अभयारण्य (Sanctuary) और 136.03 वर्ग किमी क्षेत्र को कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री से की अपील
सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि:
“आप स्वयं सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गंभीरता से लें और 24 जून को दिए गए हलफनामे के अनुसार 8 अक्टूबर से पहले सारंडा को सैंक्चुअरी घोषित करें। अगर अब भी देरी हुई, तो यह अदालत की अवमानना और जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात होगा।”
सुप्रीम कोर्ट ने दी है सख्त चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि 8 अक्टूबर 2025 तक सारंडा को सैंक्चुअरी घोषित नहीं किया गया तो झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को जेल भेजने और परमादेश (Mandamus) जारी करने की कार्रवाई की जाएगी।
सरयू राय ने रखा सबूतों के साथ पक्ष
विधायक राय ने बताया कि:
2003-04 से वे सारंडा क्षेत्र में हो रहे अविवेकपूर्ण खनन पर सरकार को आगाह करते आ रहे हैं।
2010 में जस्टिस एम.बी. शाह आयोग ने अवैध खनन की जांच कर सरकार को ठोस सुझाव दिए थे।
2011 में बनी वन्यजीव प्रबंधन समिति, 2014 में भारत सरकार द्वारा गठित कैरिंग कैपेसिटी कमेटी, और सस्टेनेबल माइनिंग मैनेजमेंट प्लान ने भी सारंडा क्षेत्र में खनन सीमित करने की सिफारिश की थी।



