जमशेदपुर : टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में तीन साल की टीएमएसटी स्किल्ड ट्रेनिंग पूरी कर चुके करीब 148 प्रशिक्षुओं ने शुक्रवार को मैनेजमेंट ट्रेनिंग सेंटर (MTC) में पहुंचकर तेज विरोध दर्ज कराया। प्रशिक्षुओं का आरोप है कि कंपनी और यूनियन के बीच पहले से हुए समझौते को दरकिनार कर अब सीधी बहाली के बजाय “NAPS” (नेशनल अप्रेंटिस प्रमोशन स्कीम) के माध्यम से थर्ड पार्टी ट्रेनिंग कराने की बात कही जा रही है।
क्या था पहले का समझौता?
टीएमएसटी (Tata Motors Skilled Training) पूरी कर चुके प्रशिक्षुओं के मुताबिक—
उन्हें अक्टूबर 2025 से 25-25 की बैच में नियुक्त करने का वादा किया गया था।
सप्ताह में 5 दिन शॉप फ्लोर वर्क और 1 दिन MTC में ट्रेनिंग देने की योजना थी।
अरका जैन यूनिवर्सिटी के माध्यम से डिप्लोमा दिलाने का खर्च कंपनी उठाने वाली थी।
जो रजिस्टर्ड वार्ड्स आगे पढ़ना चाहें, उन्हें B.Tech और M.Tech तक की पढ़ाई भी कराई जाती।
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें कंपनी में फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट (FTE) के तहत नियुक्त किया जाना था।
भविष्य में वे सुपरवाइजर या एसोसिएट पदों पर प्रमोशन के योग्य होते।
अब क्यों हुआ विरोध?
प्रशिक्षुओं ने बताया कि अब MTC में उन्हें सूचना दी जा रही है कि:
सीधी बहाली नहीं होगी।
पहले उन्हें NAPS स्कीम के तहत थर्ड पार्टी ट्रेनिंग दी जाएगी।
भविष्य की बहाली इसी ट्रेनिंग के “कैंपस सेलेक्शन” पर आधारित होगी।
यूनियन ने दिलाया आश्वासन
इस अचानक बदले फैसले से प्रशिक्षुओं को लग रहा है कि प्रबंधन सीधी बहाली के वादे से पीछे हट रहा है और उनके भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। प्रशिक्षुओं के आक्रोश को देखते हुए टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महामंत्री आर. के. सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए प्रबंधन से वार्ता की और जल्द हल निकालने का भरोसा दिलाया। यूनियन के आश्वासन के बाद ही ट्रेनीज शांतिपूर्वक वापस लौटे, लेकिन असंतोष अभी भी बना हुआ है।



