Ranchi : कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शनिवार को झारखंड कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि पिछड़े वर्गों को उनका हक दिलाने के लिए संविधान में संशोधन आवश्यक है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि झारखंड में आरक्षण बढ़ाने संबंधी विधेयक को मोदी सरकार जानबूझकर लंबित कर रही है।उन्होंने कहा कि यदि देश की आजादी के समय भारतीय जनता पार्टी सत्ता में होती तो पिछड़ा, दलित, आदिवासी और वंचित समाज को आरक्षण और उनके मूल अधिकार नहीं मिलते।
नरसिंह राव सरकार ने किया था 76वां संविधान संशोधन
विधायक यादव ने उदाहरण देते हुए बताया कि 1994 में नरसिंह राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 76वां संविधान संशोधन कर आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल किया, जिससे वह न्यायिक समीक्षा से बाहर हो गया और कानूनी रूप ले सका।उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण मिलाकर कुल आरक्षण 79 प्रतिशत है, तो फिर झारखंड जैसे राज्यों में पिछड़ों के लिए 50 प्रतिशत से ऊपर आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता?
कई राज्यों ने तोड़ी है 50% की सीमा, फिर झारखंड क्यों नहीं?
प्रदीप यादव ने यह भी बताया कि कर्नाटक, हरियाणा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और झारखंड जैसे राज्यों की विधानसभाओं ने 50 प्रतिशत की सीमा तोड़कर आरक्षण बढ़ाने का प्रयास किया है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि> “जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी”के सिद्धांत को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन किया जाए।



